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घूसकांड में फंसा फर्रुखाबाद का दरोगा, जांच में पुष्टि के बाद जेल;

घूसकांड में फंसा फर्रुखाबाद का दरोगा, जांच में पुष्टि के बाद जेल; बड़ा सवाल- आखिर कब तक भ्रष्ट तंत्र की चक्की में पिसती रहेगी जनता?

फर्रुखाबाद: कोतवाली मोहम्मदाबाद के दरोगा सुरेश चाहर नकद और ऑनलाइन घूस लेने के मामले में पूरी तरह घिर चुके हैं। एडिशनल एसपी की जांच में भ्रष्टाचार के संगीन आरोपों की पुष्टि होने के बाद आरोपी दरोगा के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है। लेकिन इस कार्रवाई के पीछे का एक सच यह भी है कि यह पूरा मामला 24 मार्च का है, जिसे दबाने और रफा-दफा करने का लंबा खेल चला।

इस घूसकांड के उजागर होने के बाद अब सीधे तौर पर कोतवाली प्रभारी (कोतवाल) विनोद कुमार शुक्ला पर भी कार्रवाई की तलवार लटक रही है। हालांकि, स्थानीय स्तर पर पुलिस के उच्च अधिकारियों द्वारा उन्हें बचाने के पुरजोर प्रयास किए जा रहे हैं, जिससे जनता में भारी आक्रोश है और सवाल उठ रहा है कि आखिर भ्रष्टाचार के इस खेल में आम जनता कब तक पिसती रहेगी?

पीड़िता का सनसनीखेज आरोप: कोतवाल विनोद शुक्ला को बचा रहे बड़े अफसर!
मामले की शिकायतकर्ता महिला प्रधान (गीता देवी) ने एक वीडियो जारी कर सीधे तौर पर पुलिस प्रशासन की निष्पक्षता को कटघरे में खड़ा किया है। पीड़िता का साफ कहना है कि पुलिस के आला अधिकारी इस पूरे घूसकांड के मुख्य सूत्रधार और कोतवाली प्रभारी विनोद कुमार शुक्ला को साफ तौर पर बचाने का प्रयास कर रहे हैं। गौरतलब है कि कोतवाल विनोद शुक्ला पर पहले भी पीड़ितों की तहरीर बदलवाने, गंभीर लापरवाही और घूसखोरी के गंभीर आरोप लग चुके हैं, लेकिन हर बार उन्हें अभयदान मिल जाता है।

निसाई क्षेत्र में कोतवाल विनोद शुक्ला पर रिश्वतखोरी का बड़ा आरोप

ग्राम प्रधान गीता देवी के अनुसार, निसाई क्षेत्र में जमीन विवाद के मामले को लेकर कोतवाल विनोद शुक्ला और दरोगा सुरेश चाहर ने मिलकर ढाई लाख रुपये के ‘सुविधा शुल्क’ (रिश्वत) की मांग की थी। इसमें से कुछ रकम नकद और कुछ ऑनलाइन भी ली गई। लेकिन जब मामला खुला, तो सिर्फ दरोगा को बलि का बकरा बनाकर कोतवाल को सुरक्षित बचाने का खेल शुरू हो गया।

अधिकारियों पर तहरीर बदलवाने और दबाव बनाने का आरोप

प्रधान पक्ष ने पुलिस के उच्चाधिकारियों की कार्यप्रणाली पर बेहद गंभीर और चौंकाने वाले आरोप लगाए हैं:

  • 3 बार बदली गई तहरीर: आरोप है कि शिकायत पत्र से इंस्पेक्टर विनोद शुक्ला का नाम हटाने के लिए अधिकारियों द्वारा दबाव बनाकर तहरीर को तीन बार बदलवाया गया।
  • मुकदमे में फंसाने की धमकी: नाम न हटाने और पीछे न हटने पर प्रधान पक्ष को फर्जी मुकदमे में फंसाने और गंभीर परिणाम भुगतने की धमकियां दी गईं।
  • खौफ में प्रधान का परिवार: उचित विधिक कार्रवाई न होने और पुलिसिया दबाव के कारण प्रधान का पूरा परिवार इस समय अत्यधिक भयभीत और डरा हुआ है। जांच के नाम पर उन पर लगातार समझौता करने का दबाव बनाया जा रहा है।

पुराना है नाता: जनपद औरैया की सदर कोतवाली में भी रहा है चर्चित नाम

यह पहला मौका नहीं है जब इंस्पेक्टर विनोद कुमार शुक्ला विवादों में आए हों। पुलिस महकमे के सूत्रों और स्थानीय चर्चाओं के अनुसार, विनोद शुक्ला का नाम इससे पहले जनपद औरैया की सदर कोतवाली में तैनाती के दौरान भी भ्रष्टाचार और विवादित कार्यप्रणाली को लेकर काफी चर्चा में रहा था। पुराने ट्रैक रिकॉर्ड के बावजूद उन्हें मोहम्मदाबाद जैसी महत्वपूर्ण कोतवाली का प्रभार सौंपना और अब घूसकांड में बचाना, पुलिस की नीयत पर सवाल खड़े करता है।

सिलसिलेवार समझिये 24 मार्च से शुरू हुआ यह पूरा मामला

ग्राम निसाई की महिला प्रधान गीता देवी ने कानपुरレンジ के एडीजी आलोक सिंह को दिए प्रार्थना पत्र में पूरे घटनाक्रम का खुलासा किया था:

  • अवैध कब्जे की शिकायत: प्रधान ने ग्राम समाज की भूमि पर भू-माफियाओं द्वारा किए गए अवैध कब्जे को लेकर जिला प्रशासन से शिकायत की थी, जिस पर कार्रवाई के आदेश भी हुए थे।
  • मदद के बदले मांगी घूस: आरोप है कि स्थानीय पुलिस ने पीड़िता को कानूनी सहायता देने के बजाय “सुविधा शुल्क” के रूप में 2.50 लाख रुपये की मांग की।
  • विपक्षियों को लाभ: प्रधान पति का आरोप है कि हल्का प्रभारी सुरेश चाहर और कोतवाली प्रभारी मोटी रकम लेकर अवैध कब्जा करने वाले विपक्षियों को सीधे तौर पर लाभ पहुंचा रहे थे।

जांच में हुई पुष्टि, दरोगा गिरफ्तार पर मुख्य आरोपी पर चुप्पी क्यों?

मामले की गंभीरता को देखते हुए एडिशनल एसपी अरुण कुमार ने जब इन आरोपों की अंदरूनी जांच की, तो दरोगा सुरेश चाहर के खिलाफ भ्रष्टाचार के सारे सबूत सही पाए गए। एसपी आरती सिंह के कड़े रुख के बाद आरोपी दरोगा के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Anti-Corruption Act) के तहत मुकदमा दर्ज कर उसे जेल भेज दिया गया है। लेकिन जनता का सवाल जस का तस है कि मुख्य आरोपी कोतवाल विनोद शुक्ला पर कार्रवाई कब होगी?


— बिंदास बोल न्यूज़, विशेष संवाददाता

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