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केसीएएस सीपीई स्टडी सर्कल द्वारा सेमिनार का आयोजन

केसीएएस सीपीई स्टडी सर्कल, कानपुर द्वारा कैप्सूल रेस्तरां में आयोजन किया गया। सेमिनार का विषय “मैटेरियलिटी से अंतिम राय तक: मास्टरिंग ऑडिट रिपोर्टिंग और ITR एवं 3CD में बदलाव” था।

इस सेमिनार में चार्टर्ड अकाउंटेंट्स (सीए) और अन्य प्रोफेशनल्स के लिए सीए अमित अग्रवाल ने आयकर रिटर्न (ITR) और फॉर्म 3CD में बदलावों पर और सीए राजीव शुक्ला ने “मैटेरियलिटी से अंतिम राय तक: मास्टरिंग ऑडिट रिपोर्टिंग” पर चर्चा की।

आयोजन का संचालन

सत्र का कुशल संचालन सीए प्रशांत रस्तोगी, कन्वीनर, द्वारा किया गया। सीए नितिन सिंह, डिप्टी कन्वीनर, ने सभी का स्वागत किया और धन्यवाद प्रस्ताव सीए राजीव गुप्ता ने प्रस्तुत किया।
सत्र की अध्यक्षता सीए दीपक कपूर ने की, जिन्होंने अपने संबोधन में कहा कि ” सभी पेशेवरों को नए ITR बदलावों और आयकर व ऑडिट के सभी प्रावधानों को ध्यानपूर्वक पढ़ना चाहिए। ITR और ऑडिट से पहले यह सुनिश्चित करें कि कोई त्रुटि न हो और सभी रिपोर्टिंग सही स्थान पर हो। इससे सरकार का विश्वास हम पर और बढ़ेगा, साथ ही सही कर जमा करवाकर देश की प्रगति में योगदान देंगे।”

सेमिनार की मुख्य विशेषताएं:

1. आयकर रिटर्न और 3CD रिपोर्ट में हुए संशोधनों की समीक्षा

ITR-1 में अब 1.25 लाख तक के दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ वाले करदाता बिना पूंजीगत हानि आगे ले जाए ITR-1 दाखिल कर सकते हैं। आधार एनरोलमेंट आईडी हटा दी गई, केवल आधार नंबर मान्य है। गैर-वेतन आय के लिए टीडीएस अनुभाग बताना अनिवार्य है। नया कर शासन डिफ़ॉल्ट है, पुराने शासन के लिए फॉर्म 10-IEA जरूरी है। मानक कटौती 50,000 से बढ़कर 75,000 रुपये हुई। अग्निवीर कॉर्पस फंड के लिए धारा 80CCH कटौती जोड़ी गई। HRA, धारा 80C, 80D आदि के लिए रसीद नंबर सहित विस्तृत जानकारी अनिवार्य है।

ITR-2 में दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ की छूट सीमा 1 लाख से बढ़कर 1.25 लाख रुपये हुई। RNOR के लिए भारत में बिताए दिनों का विवरण देना होगा। ReIT (Real Estate Investment Trust), InvIT (Infrastructure Investment Trust) और AIFs (Alternative Investment Funds) से आय के लिए नया अनुभाग जोड़ा गया। 1 अक्टूबर 2024 से बाय-बैक आय को डीम्ड डिविडेंड माना जाएगा, पूंजीगत हानि आगे ले जाई जा सकती है। शेड्यूल AL की संपत्ति रिपोर्टिंग सीमा 50 लाख से बढ़कर 1 करोड़ रुपये हुई। धारा 80DD और 80U के लिए विकलांगता प्रमाणपत्र का पावती नंबर जरूरी है।

ITR-3 में गैर-वेतन आय के लिए टीडीएस अनुभाग अनिवार्य है। क्रिप्टो जैसी वर्चुअल डिजिटल संपत्तियों की आय केवल ITR-3 में रिपोर्ट होगी। व्यवसाय/पेशे से नकद प्राप्तियों का नया क्षेत्र जोड़ा गया। 23 जुलाई 2024 से पहले और बाद के पूंजीगत लाभ अलग-अलग बताने होंगे। नए कर शासन से बाहर
निकलने के लिए फॉर्म 10-IEA की पुष्टि जरूरी है। अग्निवीर कॉर्पस फंड के लिए धारा 80CCH कटौती जोड़ी गई।

ITR-4 में 1.25 लाख तक के दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ की रिपोर्टिंग की अनुमति है। धारा 44ADA अब केवल व्यक्तियों के लिए है, HUF शामिल नहीं। प्रिजम्पटिव टैक्सेशन सीमा व्यवसायों के लिए 3 करोड़ और पेशेवरों के लिए 75 लाख रुपये है, यदि 95% प्राप्तियां डिजिटल हैं। सभी सक्रिय बैंक खातों की रिपोर्टिंग अनिवार्य है, दो साल से निष्क्रिय खाते छूट प्राप्त हैं। विदेशी कंपनियों से जुड़े करदाता ITR-4 दाखिल नहीं कर सकते।
फॉर्म 3CD में संबंधित पक्ष लेनदेन के लिए खंड 13 में विस्तृत विवरण जरूरी है। प्रिजम्पटिव टैक्सेशन के लिए डिजिटल भुगतान की रिपोर्टिंग खंड 16 में अनिवार्य है। पूंजीगत लाभ के लिए खंड 18 में 23 जुलाई 2024 से पहले और बाद के लेनदेन अलग-अलग बताने होंगे। खंड 34 में टीडीएस अनुभाग का विवरण अनिवार्य है। MSME इकाइयों को किए गए भुगतान, धारा 15 के अनुसार भुगतान और धारा 43B(h) के तहत न किए गए भुगतान का खुलासा करना होगा।

2. ऑडिट प्रक्रिया के चरण और पेशेवर मानकों पर विस्तृत चर्चा”

सीए राजीव शुक्ला ने ऑडिट प्रक्रिया पर विस्तृत चर्चा की। इस सत्र में ऑडिट के प्रमुख चरणों—महत्वपूर्ण वित्तीय जानकारी की पहचान, जोखिम मूल्यांकन, साक्ष्य एकत्रण, निष्कर्षों का मूल्यांकन, ऑडिट राय निर्माण और स्पष्ट रिपोर्टिंग—पर प्रकाश डाला गया।

सीए राजीव शुक्ला ने बताया कि ऑडिट प्रक्रिया का पहला चरण भौतिकता मूल्यांकन है, जिसमें वित्तीय जानकारी की महत्ता का निर्धारण किया जाता है। इसके बाद जोखिम मूल्यांकन में त्रुटियों या धोखाधड़ी के कारण होने वाली गलतियों की पहचान की जाती है। साक्ष्य एकत्रण में लेनदेन और नियंत्रणों की जांच शामिल है, जबकि निष्कर्षों का मूल्यांकन यह सुनिश्चित करता है कि वित्तीय विवरण सटीक हैं। ऑडिट राय चार प्रकार की हो सकती है—अपरिवर्तित, योग्य, प्रतिकूल या अस्वीकरण—जो वित्तीय विवरणों की विश्वसनीयता को दर्शाती है।

स्पष्ट और मानक-अनुरूप रिपोर्टिंग ऑडिट प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो हितधारकों को ऑडिट निष्कर्षों को समझने में मदद करती है। सीए राजीव शुक्ला ने जोर दिया कि पेशेवरों को तकनीकी विशेषज्ञता, पेशेवर निर्णय, संचार कौशल और नैतिक मानकों का पालन करना चाहिए।

उपस्थित गणमान्य व्यक्ति :
सेमिनार में कई गणमान्य चार्टर्ड अकाउंटेंट्स उपस्थित रहे, जिनमें से प्रमुख रूप से सीए साक्षी गर्ग , सीए राजीव गुप्ता, सीए पूनम प्रजापति, सीए प्रमोद सक्सेना, सीए शरद सिंघल, सीए गोविंद कृष्ण, सीए मनोज शर्मा, सीए ए एस भट्टी के साथ-साथ अन्य कई प्रतिष्ठित सीए ने भी इस सेमिनार में भाग लिया।

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