चांदी के आभूषणों के लिए अनिवार्य एचयूआईडी,शुद्धता की गारंटी और नकली हॉलमार्किंग पर रोक लगाने में एक महत्वपूर्ण कदम-उपभोक्ता कार्य एवं खाद्य सार्वजनिक वितरण मंत्रालय।
दिल्ली,चांदी के लिए अनिवार्य एचयूआईडी लागू होने के बाद पहले तीन महीनों के भीतर, 17 लाख से ज़्यादा चांदी की हॉलमार्किंग की जा चुकी है, जो ज्वैलर्स और उपभोक्ताओं के बीच इसकी बढ़ती लोकप्रियता को दर्शाता है। हालाँकि चांदी हॉलमार्किंग योजना स्वैच्छिक बनी हुई है, फिर भी हॉलमार्क वाली किसी भी चांदी की वस्तु के लिए एचयूआईडी मार्किंग अनिवार्य कर दी गई है ।मजबूत रुझान: 17 लाख से अधिक वस्तुओं को पहले ही एचयूआईडी के साथ हॉलमार्क किया जा चुका हैसिल्वर एचयूआईडी पोर्टल की शुरुआत के बाद से, यानी तीन महीनों के भीतर, 17 लाख से ज़्यादा चांदी के आभूषणों की हॉलमार्किंग की जा चुकी है।
शुद्धता ग्रेड 925 और 800, सभी हॉलमार्क वस्तुओं का लगभग 90% हिस्सा हैं। एचयूआईडी की शुरुआत के बाद इसमें उल्लेखनीय तेज़ी देखी गई है। वित्त वर्ष 2024-25 में, लगभग 32 लाख चांदी की वस्तुओं की हॉलमार्किंग की गई। यह उछाल एचयूआईडी प्रणाली में उपभोक्ताओं और ज्वैलर्स के मज़बूत विश्वास को दर्शाता है।चांदी की हॉलमार्किंग के ट्रेंड्स दर्शाते हैं कि देश का दक्षिणी क्षेत्र हॉलमार्किंग के मामले में सबसे आगे है, उसके बाद पश्चिमी और पूर्वी क्षेत्र का स्थान है। उत्पाद श्रेणियों में, पायल/ एंकलेट की हिस्सेदारी सबसे ज़्यादा है और ये मुख्य रूप से 800 शुद्धता ग्रेड में हॉलमार्क की जाती हैं। इसके बाद चांदी के दीये आते हैं, जो आमतौर पर 800 और 925 शुद्धता ग्रेड में होते हैं।केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्री श्री प्रहलाद जोशी ने ट्वीट कर बताया कि – “चांदी के आभूषणों में हॉलमार्किंग में एचयूआईडी शुद्धता आश्वासन को मजबूत करने और नकली हॉलमार्किंग प्रथाओं को खत्म करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। स्वैच्छिक (बीआईएस) हॉलमार्क वाली चांदी की वस्तुओं पर एचयूआईडी अनिवार्य होने के साथ, प्रत्येक आभूषण पर एक विशिष्ट 6-अंकीय पहचान कोड होता है जो पूर्ण डिजिटल ट्रेसेबिलिटी और बेहतर उपभोक्ता संरक्षण को सक्षम बनाता है। एचयूआईडी प्रणाली के तहत पहले से ही 17.35 लाख से अधिक वस्तुओं की हॉलमार्किंग की जा चुकी है, यह पहल उपभोक्ताओं और हितधारकों के बीच अधिक पारदर्शिता, जवाबदेही और विश्वास पैदा कर रही है।भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) ने 1 सितंबर 2025 से चांदी के आभूषणों और कलाकृतियों के लिए अनिवार्य हॉलमार्किंग विशिष्ट पहचान (एचयूआईडी) लागू करने की घोषणा की है, जो उपभोक्ता संरक्षण, शुद्धता आश्वासन को मजबूत करने और नकली हॉलमार्किंग को रोकने की दिशा में एक बड़ा कदम है ।यह प्रणाली 1610 बीआईएस-मान्यता प्राप्त परख एवं हॉलमार्किंग केंद्रों (एएचसी) और 2.08 लाख से अधिक पंजीकृत स्वर्ण जौहरियों द्वारा समर्थित है। अब तक 56 करोड़ से अधिक आभूषणों की हॉलमार्किंग की जा चुकी है, जिनमें से 7.81 करोड़ आभूषणों की हॉलमार्किंग अकेले 2025-26 में की जाएगी। हॉलमार्किंग प्रक्रिया, यानी आवक रसीद और वजन से लेकर एक्सआरएफ परीक्षण, नमूनाकरण, अग्नि परख और लेजर अंकन तक, पूरी तरह से डिजिटल हो गई है, और प्रत्येक वस्तु को एक विशिष्ट छह अंकों का एचयूआईडी दिया गया है।सोने के लिए एचयूआईडी प्रणाली द्वारा बनाई गई मजबूत नींव पर निर्माण करते हुए, भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) ने 1 सितंबर 2025 से हॉलमार्क चांदी के आभूषणों के लिए अनिवार्य हॉलमार्किंग विशिष्ट पहचान (एचयूआईडी) की शुरुआत की है, जो उपभोक्ता संरक्षण को मजबूत करने और नकली हॉलमार्किंग प्रथाओं पर अंकुश लगाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
सतीशकुमार मंडोरा बिंदास बोल संवाददाता मुंबई।

