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उर्सला अस्पताल में सरकारी शव एंबुलेंस का ‘धंधा’ वायरल वीडियो ने खोली व्यवस्था की पोल

निजी ड्राइवर चला रहे सरकारी गाड़ी, परिजनों से वसूली के आरोप—जांच की उठी मांग

कानपुर के उर्सला अस्पताल में सरकारी शव एंबुलेंस के कथित दुरुपयोग का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि सरकारी संसाधनों को खुलेआम निजी कमाई का जरिया बनाया जा रहा है, जबकि जिम्मेदार अधिकारी चुप्पी साधे बैठे हैं।

वायरल वीडियो में साफ तौर पर दावा किया गया है कि यूपी 41 जी 3848 नंबर की सरकारी शव एंबुलेंस को निर्धारित सरकारी ड्राइवर बृजेन्द्र उर्फ राजोल के बजाय एक निजी व्यक्ति चला रहा है। इतना ही नहीं, अस्पताल परिसर में निजी एंबुलेंसों का भी संचालन धड़ल्ले से किए जाने का आरोप है।

सबसे गंभीर आरोप यह है कि शव को पोस्टमार्टम तक पहुंचाने के नाम पर मृतकों के परिजनों से मनमाना किराया वसूला जा रहा है। वीडियो में कथित तौर पर ड्राइवर को पैसे लौटाते हुए भी सुना जा सकता है, जिससे पूरे खेल की परतें खुलती नजर आ रही हैं।

मामले में अस्पताल के कुछ अधिकारियों की मिलीभगत होने की भी आशंका जताई जा रही है, हालांकि उर्सला अस्पताल प्रशासन फिलहाल इस पूरे प्रकरण पर चुप्पी साधे हुए है।

अब सवाल यह है कि क्या सरकारी एंबुलेंस भी ‘कमाई का जरिया’ बन चुकी हैं? और अगर हां, तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई कब होगी? शहर में इस मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग तेज हो गई है।
बिंदास बोल कानपुर से राजू गौड़ की रिपोर्ट

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