राम मंदिर चढ़ावा चोरी का खेल बेनकाब: SIT रिपोर्ट में सनसनीखेज खुलासे, 70 बार कैमरे में कैद हुई चोरी; ट्रस्ट और बैंक पर उठे गंभीर सवाल
बिंदास बोल न्यूज विशेष संवाददाता | अयोध्या
अयोध्या। अयोध्या के भव्य श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के चढ़ावा गणना कक्ष (Donation Counting Room) में बड़े पैमाने पर हुई चोरी और गबन के मामले में विशेष जांच दल (SIT) की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सार्वजनिक हो गई है। इस रिपोर्ट ने मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक प्रबंधन की पोल खोलकर रख दी है। एसआईटी की रिपोर्ट के अनुसार, दान में आए पैसों की गिनती के दौरान सुरक्षा मानकों की हर स्तर पर घोर अनदेखी की गई, जिसके चलते आरोपियों ने बेखौफ होकर इस काली करतूत को अंजाम दिया।
70 बार कैमरे में कैद हुई नोटों की चोरी, 27 अप्रैल से पहले भी हुई गड़बड़ी
एसआईटी द्वारा खंगाले गए सीसीटीवी फुटेज में बेहद चौंकाने वाली तस्वीरें सामने आई हैं। उपलब्ध फुटेज के अनुसार, गणना कार्य में लगे कर्मियों द्वारा करीब 70 बार नोटों की गड्डियां और खुले नोटों को छिपाने जैसी संदिग्ध गतिविधियां कैमरे में साफ दर्ज हुई हैं।
रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि यह खेल 27 अप्रैल से पहले भी लगातार चल रहा था। हालांकि, उस अवधि का सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध न होने की वजह से वास्तविक वित्तीय नुकसान का सटीक आकलन नहीं किया जा सका है। इस आशंका को तब और बल मिला जब आरोपियों के बयानों और उनके बैंक खातों की जांच की गई, जिसमें उनकी वैध आय से कहीं अधिक धनराशि जमा पाई गई है।
SIT की प्रारंभिक रिपोर्ट के मुख्य बिंदु:
- कैमरे में कैद: करीब 70 बार नोटों की गड्डियां और खुले पैसे छिपाते दिखे कर्मी।
- सीसीटीवी लापरवाही: 180 दिन के बजाय केवल 45 दिन का ही सीसीटीवी बैकअप रखा जा रहा था।
- कार्रवाई की सिफारिश: कुल 8 लोगों के खिलाफ नामजद एफआईआर (FIR) दर्ज करने की संस्तुति।
- बदला गया नियम: अनिवार्य तलाशी को बदलकर ‘रैंडम तलाशी’ करने से सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हुई।
सुरक्षा मानकों की उड़ी धज्जियां: ‘अनिवार्य’ तलाशी को किया ‘रैंडम’
एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में ट्रस्ट और बैंक के सुरक्षा प्रबंधन पर तीखे सवाल खड़े किए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, 20 सितंबर 2024 को ट्रस्ट और बैंक के बीच हुए समझौते के तहत गणना कक्ष में प्रवेश और निकास के लिए बेहद कड़े नियम बनाए गए थे।
इसके विपरीत, 6 फरवरी 2025 को जारी नई एसओपी (SOP) में ‘अनिवार्य तलाशी’ के नियम को बदलकर केवल ‘नियमित या रैंडम तलाशी’ कर दिया गया, जिससे चोरों के हौसले बुलंद हो गए। इसके अलावा, गणना कक्ष में निर्धारित वेशभूषा (यूनिफॉर्म) न होना, निजी सामान पर प्रतिबंध का पालन न होना और मूल्यवर्गवार अभिलेखीकरण का प्रभावी ढंग से लागू न होना इस गबन की मुख्य वजह बना।
इन बड़े चेहरों और अधिकारियों पर गिरी गाज, FIR की संस्तुति
रिपोर्ट के आधार पर एसआईटी ने इस पूरे प्रकरण में संलिप्त 8 लोगों के विरुद्ध तत्काल प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने की संस्तुति की है।
- डॉ. अनिल मिश्रा की निगरानी पर सवाल: ट्रस्ट के प्रतिनिधि के रूप में डॉ. अनिल मिश्रा और बैंक ने गाइडलाइंस जारी की थीं। एसओपी लागू होने के बाद उसकी समीक्षा और सतत पर्यवेक्षण (निगरानी) करने में उनकी तरफ से बड़ी कमी पाई गई।
- सुभाष श्रीवास्तव (गणना कक्ष प्रभारी) जिम्मेदार: एसआईटी ने इन्हें सुरक्षा व्यवस्था सुचारू रूप से लागू न करा पाने और नियमित तलाशी सुनिश्चित न करने के चलते प्रमुख रूप से विफल और जिम्मेदार माना है। इनके खिलाफ भी प्राथमिकी की सिफारिश की गई है।
- रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू की संदिग्ध भूमिका: टिन्नू यादव के पास मंदिर परिसर की विभिन्न हुंडियों (दानपात्रों) की चाबियां रहती थीं, जबकि इसके लिए उनके पास कोई लिखित या औपचारिक आदेश नहीं था। यही नहीं, उन्होंने अपने रिश्तेदार मनीष कुमार यादव को भी सिफारिश कर गणना ड्यूटी में लगवाया, जिसे इस गबन का सीधा अवसर मिला।
बैंक अधिकारियों की लापरवाही भी आई सामने, जांच अभी जारी
गड़बड़ी का यह दायरा सिर्फ मंदिर प्रशासन तक सीमित नहीं है, बल्कि बैंक स्तर पर भी भारी लापरवाही सामने आई है। बैंक की ओर से गणना कर्मियों को निर्धारित जेब रहित वेशभूषा उपलब्ध नहीं कराई गई। साथ ही, बैंक प्रतिनिधियों की मौजूदगी के बावजूद निगरानी लचर रही और अधिकारियों के मासिक रोटेशन (तबादले) के नियम का भी पालन नहीं किया गया।
एसआईटी ने स्पष्ट किया है कि यह केवल एक प्रारंभिक (Preliminary) रिपोर्ट है और विस्तृत जांच अभी भी सरगर्मी से जारी है। अंतिम रिपोर्ट में प्रशासनिक जवाबदेही, संस्थागत खामियों और भविष्य के कड़े सुधारात्मक उपायों पर विस्तृत निष्कर्ष प्रस्तुत किए जाएंगे।

