करप्शन और अनियमितताओं का अड्डा बना कानपुर सेंट्रल का पार्सल विभाग

📌शिकायतों में दावा—
📍दलालों का कब्जा, करोड़ों की टैक्स चोरी और अवैध वसूली का खेल; DGGI कार्रवाई के बाद बढ़े सवाल
कानपुर। उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े औद्योगिक शहर कानपुर का प्रमुख रेलवे स्टेशन कानपुर सेंट्रल एक बार फिर गंभीर आरोपों के कारण चर्चा में है। पार्सल बुकिंग ऑफिस और कमर्शियल विभाग में भ्रष्टाचार, अवैध वसूली, बाहरी लोगों की दखलअंदाजी तथा बड़े पैमाने पर टैक्स चोरी को संरक्षण दिए जाने के आरोपों ने रेलवे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पीड़ित व्यापारियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा नॉर्थ सेंट्रल रेलवे (एनसीआर) मुख्यालय, प्रयागराज में की गई लिखित शिकायत में पूरे मामले की निष्पक्ष विजिलेंस जांच की मांग की गई है।

📷 : एनसीआर मुख्यालय, प्रयागराज में रेलवे विजिलेंस को सौंपी गई शिकायत की प्रति।—
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि कानपुर सेंट्रल का पार्सल विभाग वर्षों से एक संगठित सिंडिकेट की तरह संचालित हो रहा है। उनका कहना है कि बिना अवैध धनराशि दिए न तो माल की बुकिंग आसानी से होती है और न ही समय पर डिलीवरी मिलती है। व्यापारियों का आरोप है कि प्रति नग और प्रति बोरा के हिसाब से अवैध वसूली की जाती है और विरोध करने वालों को विभिन्न तरीकों से परेशान किया जाता है।बाहरी लोगों के भरोसे चल रहा सरकारी कार्यालय!शिकायत में आरोप लगाया गया है कि पार्सल बुकिंग कार्यालय और चीफ पार्सल सुपरिंटेंडेंट (सीपीएस) कार्यालय में सरकारी कर्मचारियों के बजाय बाहरी व्यक्तियों तथा सेवानिवृत्त कर्मचारियों की सक्रिय भूमिका है। आरोप है कि यही लोग सरकारी कंप्यूटरों पर बैठकर काम करते हैं, फाइलें निपटाते हैं और व्यापारियों से लेन-देन का पूरा तंत्र संभालते हैं।

📷 : कानपुर सेंट्रल के पार्सल बुकिंग एवं सीपीएस कार्यालय में बैठे कथित बाहरी व्यक्ति और सेवानिवृत्त कर्मचारी।
📌करोड़ों के माल पर नहीं हिसाब, न हीं मार्का, शिकायत में यह भी कहा गया है कि स्टेशन के माल गोदामों में बिना उचित अभिलेख, बिना मार्किंग और बिना स्पष्ट लेखा-जोखा के करोड़ों रुपये का सामान लंबे समय तक पड़ा रहता है। आरोप है कि पार्सल एवं लीज बोगियों का उपयोग टैक्स चोरी वाले माल के परिवहन में किया जाता है, जिससे सरकार को प्रतिवर्ष करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान होता है।

📸सेंट्रल के माल गोदाम में बिना स्पष्ट मार्किंग और रिकॉर्ड के रखा
👉व्यापारियों का आरोप
📍कटमनी नहीं तो उत्पीड़न
कपड़ा, रेडीमेड और पान मसाला कारोबारियों का आरोप है कि उनसे हर महीने बड़ी रकम की अवैध वसूली की जाती है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि जो व्यापारी इस व्यवस्था का विरोध करता है, उसके माल पर भारी-भरकम वारफेज शुल्क लगा दिया जाता है या फिर जीएसटी कार्रवाई का डर दिखाकर दबाव बनाया जाता है।DGGI की कार्रवाई के बाद खुलने लगीं परतें, मामले ने नया मोड़ तब लिया जब डायरेक्ट्रेट जनरल ऑफ जीएसटी इंटेलिजेंस (DGGI) ने हाल ही में कानपुर से जुड़े कुछ कारोबारियों के ठिकानों पर कार्रवाई की। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि जांच के दौरान मिले दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों में कथित वित्तीय लेन-देन तथा कुछ रेलवे अधिकारियों और दलालों के बीच संपर्क के संकेत मिले हैं। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि संबंधित जांच एजेंसियों द्वारा सार्वजनिक रूप से नहीं की गई है।
👉निष्पक्ष जांच की मांग
व्यापारियों और शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यदि पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए तो रेलवे राजस्व को नुकसान पहुंचाने वाले कथित नेटवर्क का खुलासा हो सकता है। अब निगाहें नॉर्थ सेंट्रल रेलवे मुख्यालय, रेलवे विजिलेंस और DGGI की आगे की कार्रवाई पर टिकी हैं।
«”यदि शिकायतों की निष्पक्ष जांच होती है तो वर्षों से चल रही कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार की परतें खुल सकती हैं। 📍शिकायतकर्ता
👉”रेलवे की पारदर्शिता और सरकारी राजस्व की सुरक्षा के लिए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई जरूरी है।” 📍व्यापारियों की मांग
»नोट: इस समाचार में वर्णित आरोप शिकायतकर्ताओं के दावों पर आधारित हैं। संबंधित रेलवे अधिकारियों एवं अन्य पक्षों का आधिकारिक पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

