धोखाधड़ी के मामलों में आरोपी बताए गए महेंद्र गोयनका को सुप्रीम कोर्ट से भी नहीं मिली राहत, अंतरिम प्रतिबंध जारी
सुप्रीम कोर्ट ने जियोमिन इंडस्ट्रीज और यूरो प्रतीक इस्पात इंडिया के बीच चल रहे विवाद में महेंद्र गोयनका से संबंधित याचिका पर हस्तक्षेप से इनकार कर दिया। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का अंतरिम प्रतिबंध फिलहाल जारी रहेगा। जबलपुर कमर्शियल कोर्ट को लंबित आवेदन पर दो माह में निर्णय लेने का निर्देश दिया गया है।
धोखाधड़ी के मामलों में आरोपी बताए गए महेंद्र गोयनका को सुप्रीम कोर्ट से भी नहीं मिली राहत, अंतरिम प्रतिबंध जारी
ब्यूरो, प्रयागराज। जियोमिन इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड और यूरो प्रतीक इस्पात इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के बीच चल रहे कारोबारी विवाद में महेंद्र गोयनका से संबंधित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है। शीर्ष अदालत ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ओर से लगाए गए अंतरिम प्रतिबंध को फिलहाल जारी रखने का निर्देश दिया है।
सुप्रीम कोर्ट की न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ ने 7 अगस्त को मामले में आदेश पारित किया। अदालत ने जबलपुर की कमर्शियल कोर्ट को सीपीसी के आदेश 39 के नियम 1 और 2 के तहत लंबित आवेदन पर दो माह के भीतर निर्णय लेने का निर्देश दिया है।
1.70 लाख टन आयरन ओर की खरीद से जुड़ा विवाद
पूरा विवाद जियोमिन इंडस्ट्रीज द्वारा यूरो प्रतीक इस्पात इंडिया से करीब 1.70 लाख टन आयरन ओर की खरीद के अनुबंध से जुड़ा है। जियोमिन इंडस्ट्रीज का आरोप है कि अनुबंध के तहत खरीदे गए आयरन ओर की आपूर्ति नहीं की गई और समझौते की शर्तों का पालन नहीं हुआ।
इसके बाद जियोमिन इंडस्ट्रीज की ओर से जबलपुर की डिस्ट्रिक्ट जज कमर्शियल कोर्ट में वाद दायर किया गया। मामले में अंतरिम राहत को लेकर न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ी और मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने अंतरिम प्रतिबंध लगाया था।
सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश के बाद यह प्रतिबंध फिलहाल प्रभावी रहेगा। वहीं, कमर्शियल कोर्ट को संबंधित लंबित आवेदन पर दो माह के भीतर फैसला करना होगा।
मध्यस्थता से नहीं निकला समाधान
जानकारी के अनुसार, दोनों कंपनियों के बीच विवाद को आपसी सहमति से सुलझाने के लिए मध्यस्थता की प्रक्रिया भी अपनाई गई थी, लेकिन इसमें कोई अंतिम समाधान नहीं निकल सका। इसके बाद जियोमिन इंडस्ट्रीज ने कमर्शियल कोर्ट का रुख किया।
यूरो प्रतीक इस्पात इंडिया प्राइवेट लिमिटेड में रायपुर निवासी महेंद्र गोयनका के प्रमुख शेयरधारक होने की बात सामने आई है।
कई मामलों में आरोप, जांच के बाद होगी स्थिति स्पष्ट
कंपनी से जुड़े विवादों को लेकर कटनी और माधवनगर थानों में भी अलग-अलग मामले दर्ज होने का दावा किया गया है। इन मामलों में धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और जाली दस्तावेजों से संबंधित धाराएं लगाए जाने की जानकारी सामने आई है।
शिकायतों में महेंद्र गोयनका के सहयोगी बताए गए हिमांशु श्रीवास्तव, सन्मति जैन और सुनील अग्रवाल समेत अन्य लोगों पर कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज और हस्ताक्षर के जरिए कंपनियों पर नियंत्रण हासिल करने के आरोप लगाए गए हैं। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के अंतिम परिणाम के बाद ही होगी।
इसके अलावा कोलकाता में भी महेंद्र गोयनका के खिलाफ कथित वित्तीय अनियमितताओं और कंपनी के शेयरों से जुड़े मामले में प्राथमिकी दर्ज होने की जानकारी दी गई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, जुलाई में कोलकाता पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर मामले में पूछताछ की थी।
दूसरी कंपनी को आयरन ओर बेचने का आरोप
जियोमिन इंडस्ट्रीज का आरोप है कि जिस आयरन ओर की खरीद के लिए उसके साथ अनुबंध किया गया था, उसे कथित तौर पर किसी अन्य कंपनी को बेच दिया गया। इसी विवाद को लेकर कंपनी ने न्यायालय की शरण ली।
अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद मामले की अगली महत्वपूर्ण कार्रवाई जबलपुर कमर्शियल कोर्ट में होगी, जहां लंबित आवेदन पर दो माह के भीतर फैसला किया जाना है।
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