श्रमिकों की अनदेखी अब नहीं चलेगी” — भारतीय मजदूर संघ का हुंकार

कानपुर। श्रमिक हितों की आवाज बुलंद करते हुए भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) ने 25 फरवरी 2026, बुधवार को कानपुर जिला मुख्यालय पर प्रभावी प्रदर्शन कर “विरोध दिवस” मनाया।
📍 ओडिशा के पुरी में आयोजित 21वें अखिल भारतीय अधिवेशन के आह्वान पर हुए इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं ने भाग लिया और डीएम कार्यालय पर धरना देते हुए प्रधानमंत्री, केंद्रीय श्रम मंत्री एवं मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपा।
📌धरने को संबोधित करते हुए पदाधिकारियों ने स्पष्ट कहा—“सरकारें बदलती रहीं, लेकिन श्रमिकों की समस्याएँ जस की तस बनी रहीं। अब श्रमिक समाज अपने अधिकारों के लिए निर्णायक लड़ाई को तैयार है।”नेताओं ने कहा कि लाखों मिड-डे मील, आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता आज भी अत्यंत कम मानदेय पर 10-10 घंटे से अधिक काम करने को विवश हैं।
📍“पाँच दशकों की सेवा के बाद भी आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को ‘योजना कर्मी’ कहकर उनका सम्मान और अधिकार दोनों छीने जा रहे हैं,” उन्होंने आरोप लगाया।
📌संगठन ने महिला एवं बाल विकास मंत्रालय पर मानदेय वृद्धि के प्रति उदासीन रवैया अपनाने का आरोप भी लगाया।वक्ताओं ने कहा कि आठ राज्यों में राष्ट्रीय वस्त्र निगम (एनटीसी) की मिलों के श्रमिकों को महामारी के बाद से केवल 50% वेतन दिया जा रहा है और पिछले दस महीनों से वेतन बकाया है। वहीं हेवी इंजीनियरिंग कॉरपोरेशन (एचईसी), रांची के कर्मचारियों को 32 महीनों से वेतन नहीं मिला है।“यह केवल वेतन का प्रश्न नहीं, बल्कि श्रमिक परिवारों के अस्तित्व का सवाल है,
📍” नेताओं ने कहा।देशभर के विद्युत कर्मचारी डिस्कॉम के निजीकरण के विरोध में संघर्षरत हैं। ईपीएस-95 के अंतर्गत ₹1,000 न्यूनतम पेंशन को अपर्याप्त बताते हुए इसे सम्मानजनक स्तर तक बढ़ाने की माँग की गई। बैंक कर्मचारियों द्वारा पाँच दिवसीय कार्य सप्ताह की माँग को भी न्यायोचित बताया गया।
📌कार्यक्रम में प्रदेश उपाध्यक्ष श्री सुरेश यादव, प्रदेश कोषाध्यक्ष श्री प्रदीप कुमार राय, जिला उपाध्यक्ष श्री केडी द्वेदी, श्री शंभू सिंह, श्री विनोद कुमार, श्री विजय त्रिपाठी सहित अनेक पदाधिकारी व कार्यकर्ता मौजूद रहे।
📍अंत में बीएमएस नेताओं ने चेतावनी दी—“यदि श्रमिकों की माँगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और व्यापक व निर्णायक बनाया जाएगा।”



