महंगाई का तड़का: सप्ताह भर में सरसों तेल 30 रुपये महंगा, धनिया ने भी बिगाड़ा रसोई का बजट और स्वाद
बिंदास बोल न्यूज विशेष संवाददाता | फर्रुखाबाद
फर्रुखाबाद। आम जनमानस पर महंगाई की मार अब रसोई में साफ तौर पर दिखाई देने लगी है। पिछले महज एक सप्ताह के भीतर सरसों के तेल की कीमतों में करीब 30 रुपये प्रति लीटर का जोरदार उछाल आया है, जिसने गृहणियों की रसोई का पूरा बजट गड़बड़ा कर रख दिया है। केवल तेल ही नहीं, बल्कि मसालों में मुख्य स्थान रखने वाले धनिया के दाम भी लगातार आसमान छू रहे हैं। स्थानीय व्यापारियों का मानना है कि सरसों के कम उत्पादन और थोक बाजार में सीमित आवक के कारण कीमतों में यह तेजी देखी जा रही है।
पैकिंग से लेकर खुला तेल तक सब हुआ महंगा
बाजार से मिले ताजा आंकड़ों के अनुसार, पिछले सप्ताह तक जो पैकिंग वाला सरसों का तेल 175 से 180 रुपये प्रति लीटर की दर से बिक रहा था, वह अब बढ़कर 200 से 210 रुपये प्रति लीटर के पार पहुंच चुका है। इसी तरह, खुले सरसों तेल का भाव भी 160 रुपये से उछलकर सीधे 190 रुपये प्रति लीटर हो गया है।
मसालों की बात करें तो धनिया के दाम में पिछले एक सप्ताह में करीब 40 रुपये और बीते एक महीने में लगभग 60 रुपये प्रति किलो की भारी वृद्धि दर्ज की गई है। एक माह पूर्व जो धनिया 120 रुपये प्रति किलोग्राम था, वह अब बाजार में 180 रुपये प्रति किलोग्राम की दर पर बिक रहा है।
बाजार भाव पर एक नजर (कीमतें प्रति लीटर/किलो में):
- पैकिंग सरसों तेल: पहले 175-180 रुपये | अब 200-210 रुपये
- खुला सरसों तेल: पहले 160 रुपये | अब 190 रुपये
- धनिया (खड़ा/पाउडर): पहले 120 रुपये | अब 180 रुपये
- सरसों का थोक भाव: वर्तमान में करीब 7,500 रुपये प्रति क्विंटल
कम उत्पादन और सहालग से और बढ़ेंगी कीमतें
स्थानीय किराना व्यापारी रवि राठौर ने बताया कि इस बार देश में सरसों का उत्पादन अपेक्षाकृत काफी कम रहा है। वर्तमान में सरसों का थोक भाव करीब 7,500 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया है, जिससे मिलों से तेल की लागत बढ़कर आ रही है। वहीं व्यापारी अजय गुप्ता का कहना है कि थोक मंडियों से लगातार महंगा माल मिल रहा है। आगामी सहालग (शादियों का सीजन) के दौरान मांग और ज्यादा बढ़ेगी, जिससे तेल और मसालों के दामों में और भी ज्यादा उछाल आने की प्रबल संभावना है।
जनता की जुबानी: ‘तड़के का जायका हुआ फीका’
गंगानगर की रहने वाली गृहणी रेखा देवी ने अपनी व्यथा साझा करते हुए बताया कि पहले वह पूरे महीने भर का तेल एक साथ खरीद कर रख लेती थीं, लेकिन अब बढ़ी हुई कीमतों के कारण केवल जरूरत के हिसाब से ही थोड़ा-थोड़ा तेल खरीदना पड़ रहा है। वहीं पूजा मिश्रा ने बताया कि तेल और मसालों की इस बेतहाशा मूल्यवृद्धि ने दाल के तड़के का जायका ही फीका कर दिया है, जिससे मध्यवर्गीय परिवारों के सामने घर चलाना मुश्किल हो रहा है।

