फर्रुखाबाद: विधायक की शह पर सरकारी जमीन पर कब्जे का खेल! शिकायत करने गए प्रधान पुत्र को पुलिस ने हड़काकर भगाया; अगले ही दिन फायरिंग और पथराव में 7 घायल
बिंदास बोल न्यूज विशेष संवाददाता (ब्यूरो रिपोर्ट) | फर्रुखाबाद न्यूज़
मोहम्मदाबाद (फर्रुखाबाद)। कोतवाली क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले गैसिंगपुर प्लांट मार्ग पर स्थित निसाई ग्रामसभा की 10 बिस्वा बेशकीमती सरकारी जमीन को लेकर खूनी संघर्ष हो गया. एक रसूखदार विधायक की कथित शह के चलते बेपरवाह बनी मोहम्मदाबाद पुलिस की बड़ी लापरवाही के कारण दबंगों ने तांडव मचाया. आरोपियों ने निसाई की महिला प्रधान के परिवार पर जानलेवा हमला बोलते हुए फायरिंग, पथराव और लाठी-डंडों से प्रधान के पति व दो पुत्रों समेत सात लोगों को गंभीर रूप से घायल कर दिया. सभी घायलों का इलाज अस्पताल में चल रहा है.
‘कार्रवाई मांगते ही कोतवाल ने हड़काकर भगा दिया था’
आवास विकास के एक निजी अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रहे निसाई की प्रधान गीता देवी के पुत्र अभय प्रताप सिंह ने एएसपी (ASP) गिरीश कुमार सिंह को आपबीती सुनाई. अभय ने बताया कि रविवार की शाम पड़ोसी गांव मुड़गांव के प्रधान रामनारायण जबरन सरकारी जमीन की जुताई करवा रहे थे. जब उनके पिता सत्येंद्र सिंह ने मौके पर जाकर सरकारी जमीन पर काम रोकने को कहा, तो उनके साथ मारपीट की गई.
इसके बाद वे प्रधान मां गीता देवी की ओर से लिखित तहरीर लेकर मोहम्मदाबाद थाने पहुंचे. आरोप है कि वहां तैनात कोतवाली प्रभारी मदन मोहन चतुर्वेदी ने कार्रवाई करने के बजाय समझौते का अनुचित दबाव बनाया. जब पीड़ित पक्ष ने सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की, तो कोतवाल ने उन्हें बुरी तरह हड़काकर थाने से भगा दिया. पीड़ित का कहना है कि अगर पुलिस रविवार को ही सख्त कदम उठा लेती, तो सोमवार को इतनी बड़ी वारदात न होती.
विवाद और हमले से जुड़े मुख्य तथ्य:
- विवादित जमीन: निसाई ग्रामसभा की 10 बिस्वा बेशकीमती सरकारी भूमि.
- पीड़ित पक्ष: निसाई की प्रधान गीता देवी, पति सत्येंद्र सिंह और उनके दो पुत्र.
- आरोपी पक्ष: मुड़गांव के प्रधान रामनारायण और अन्य बाहरी दबंग.
- हमले का तरीका: अवैध हथियारों से फायरिंग, भारी पथराव और लाठी-डंडों से प्रहार.
- पुलिस की भूमिका: पीड़ित की तहरीर पर मुकदमा दर्ज न करने और भगाने का गंभीर आरोप.
प्रधान पहुंचीं संपूर्ण समाधान दिवस, इधर गांव में हो गया कांड
पुलिस के अड़ियल और टालमटोल रवैये से बड़ी वारदात की आशंका को भांपते हुए प्रधान गीता देवी सोमवार सुबह खुद अधिकारियों की चौखट यानी संपूर्ण समाधान दिवस पहुंच गईं. उन्होंने वहां दिए शिकायती पत्र में बताया कि इस जमीन को लेकर 20 जुलाई को थाने में समझौता हुआ था कि दोनों पक्ष दखल नहीं देंगे. इसके बाद 28 अगस्त को राजस्व विभाग की टीम ने बकायदा पैमाइश करके यह सरकारी भूमि उनके (गीता देवी) सुपुर्द कर दी थी.
इसके बावजूद 5 जुलाई को दोपहर साढ़े तीन बजे मुड़गांव के प्रधान रामनारायण ने मेड़ तोड़कर अवैध कब्जा करने की कोशिश की और रोकने पर अभद्रता व मारपीट की. प्रधान जब समाधान दिवस में गुहार लगा रही थीं, ठीक उसी वक्त दबंगों ने गांव में उनके परिवार को घेरकर खूनी वारदात को अंजाम दे डाला.
प्रशासनिक पुष्टि: जमीन सरकारी है, प्रधान को सौंपी गई थी सुपुर्दगी
इस पूरे मामले पर एसडीएम सदर गजराज सिंह ने स्पष्ट रूप से बताया कि जिस जमीन को लेकर यह खूनी रार मची है, वह पूरी तरह से निसाई ग्रामसभा की ही सरकारी संपत्ति है. साल 2025 में ही राजस्व टीम ने चिह्नांकन कर इस भूमि को वैधानिक रूप से प्रधान गीता देवी की सुपुर्दगी में दे दिया था. दूसरा पक्ष इस पर जबरन क्यों कब्जा जमाना चाहता है, यह जांच का विषय है. एसडीएम ने दोनों पक्षों के बीच पुरानी रंजिश होने की भी बात कही है.
गैर-प्रांत की गाड़ियों से आए थे बाहरी शूटर और हमलावर!
घटनास्थल और मुड़गांव के आसपास रविवार शाम से ही दिल्ली (DL) जैसे गैर-प्रांत के नंबरों वाली कई लग्जरी कारें मंडराती देखी गई थीं. पीड़ित परिवार ने एएसपी को बताया कि जिन लोगों ने सत्येंद्र सिंह की कार को घेरकर हमला किया और अंधाधुंध फायरिंग की, उनमें बड़ी संख्या में बाहरी अज्ञात शूटर और भाड़े के बदमाश शामिल थे. फिलहाल एएसपी के निर्देश पर पुलिस टीम मामले की गहन तफ्तीश में जुट गई है और फरार आरोपियों की धरपकड़ के लिए दबिश दी जा रही है.

