आरक्षित एससी-एसटी पदों पर कथित गड़बड़ी की होगी जांच
🟥 खबर का असर
आरक्षित एससी-एसटी पदों पर कथित गड़बड़ी की होगी जांच आरएसओ ने तलब किए अभिलेख
कानपुर। शहर के प्रतिष्ठित डीबीएस पीजी कॉलेज, डीएवी कॉलेज और महिला महाविद्यालय में आरक्षित एससी-एसटी पदों पर कथित अनियमित भर्तियों का मामला अब तूल पकड़ चुका है। खबर सामने आने के बाद क्षेत्रीय उच्च शिक्षा धिकारी (आरएसओ) कार्यालय हरकत में आ गया है और पूरे प्रकरण की जांच शुरू कर दी गई है।आरएसओ डॉ. राजेश प्रकाश ने तीनों कॉलेजों के प्रबंधन को नोटिस जारी कर संदिग्ध नियुक्तियों से जुड़े सभी अभिलेख (पत्रावलियां) तत्काल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। साथ ही स्पष्ट किया गया है कि दस्तावेजों के परीक्षण के बाद निष्पक्ष जांच के लिए एक कमेटी गठित की जाएगी।“शिकायतें बेहद गंभीर हैं। सभी अभिलेख मंगाए गए हैं। जांच में यदि गड़बड़ी पाई गई तो कड़ी कार्रवाई तय है।”
— डॉ. राजेश प्रकाश, क्षेत्रीय उच्च शिक्षाधिकारी
📍कर्मचारी ने खोली पोल, साक्ष्य भी सौंपे
🔴मामले का खुलासा डीबीएस कॉलेज के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी रविकांत त्रिपाठी की शिकायत से हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्षों से एससी-एसटी के लिए आरक्षित पदों पर अन्य वर्गों के अभ्यर्थियों की नियुक्ति की जा रही है।“आरक्षित पदों पर लगातार नियमों का उल्लंघन हुआ है। विरोध करने पर उत्पीड़न और निजी काम कराने का दबाव बनाया जाता है।”
— रविकांत त्रिपाठी, शिकायतकर्ता
📌शिकायत में तीनों कॉलेजों के संदिग्ध पदों की सूची भी सौंपी गई है—
👉डीबीएस कॉलेज: 6 पद
👉महिला महाविद्यालय: 5 पद
👉डीएवी कॉलेज: 19 पद
📍भीम आर्मी और आजाद समाज पार्टी भी कूदी
👉मामले में अब सामाजिक और राजनीतिक संगठनों की भी एंट्री हो गई है। आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) और भीम आर्मी ने इसे एससी-एसटी वर्ग के अधिकारों पर “अतिक्रमण” बताते हुए आरएसओ कार्यालय में प्रदर्शन किया और ज्ञापन सौंपा।“आरक्षित पदों पर कब्जा संविधान के खिलाफ है। निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो हम एससी-एसटी आयोग और मुख्यमंत्री तक जाएंगे।”— भीम आर्मी पदाधिकारी
💻डिजिटल साक्ष्य भी पेश
👉शिकायतकर्ताओं ने मानव सम्पदा पोर्टल से जुटाए गए स्क्रीनशॉट और स्क्रीन रिकॉर्डिंग भी साक्ष्य के तौर पर प्रस्तुत किए हैं। आरोप है कि कई कर्मचारियों को एससी-एसटी वर्ग में दर्शाया गया है, जबकि उनके पारिवारिक विवरण में सामान्य जातियों के उपनाम दर्ज हैं।
📌RTI का भी नहीं मिला जवाब
📍गौरतलब है कि इससे पहले भी संगठनों द्वारा आरटीआई के जरिए जानकारी मांगी गई थी, लेकिन अब तक कोई संतोषजनक उत्तर नहीं मिला। अब आरएसओ की सक्रियता के बाद मामले में पारदर्शी जांच की उम्मीद बढ़ गई है।
📌अब सबकी नजर जांच कमेटी पर
📍फिलहाल, पूरे मामले में अगला कदम जांच समिति का गठन और उसकी रिपोर्ट होगी। यही रिपोर्ट तय करेगी कि आरक्षण नियमों का उल्लंघन हुआ या नहीं—
और दोषियों पर क्या कार्रवाई होगी।
📌 BindasBol.co.in आपकी आवाज, आपकी खबर

