शील,समाधि और प्रज्ञा ही मुक्ति का मार्ग

📌ज्ञान, करुणा और समानता का संदेश: पंचशील भवन में भव्य बुद्ध धम्म सम्मेलन सम्पन्नऔ
📌भगवान बुद्ध का धम्म आज मानवता को शांति, विवेक और समानता का मार्ग दिखा रहा है।”
कानपुर। प्रेस क्लब में हुई कान्फ्रेंस में वक्ता ने बताया कि सिद्धार्थनगर स्थित पंचशील भवन में 21 मई 2026 को “ज्ञान लाभ दिवस” के अवसर पर एक भव्य बुद्ध धम्म सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस अवसर पर सैकड़ों श्रद्धालुओं, उपासकों और बुद्ध धम्म अनुयायियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता कर भगवान बुद्ध और डॉ. भीमराव अम्बेडकर के विचारों को आत्मसात करने का संकल्प लिया। कार्यक्रम की जानकारी प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दी गई।

📍सम्मेलन में वक्ता ने कहा कि भगवान गौतम बुद्ध का धम्म आज विश्वभर में अपनी वैज्ञानिकता, मानवीय मूल्यों और व्यावहारिक जीवन-दर्शन के कारण तेजी से फैल रहा है। “ज्ञान, शिक्षा, क्रिया और लाभ” तथा “सांसारिक दर्शन सुलाभ” जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा करते हुए वक्ता ने बताया कि बुद्ध का मार्ग केवल आध्यात्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता और मानव कल्याण का भी आधार है।

🛑“शील, समाधि और प्रज्ञा ही मुक्ति का मार्ग”
धम्म सभा में भगवान बुद्ध के उपदेशों पर प्रकाश डालते हुए कहा गया कि उन्होंने शील, समाधि, प्रज्ञा और विमुक्ति के मार्ग पर चलकर स्वयं समस्त दुखों से मुक्ति प्राप्त की और 45 वर्षों तक मानव समाज को दुःखों से मुक्ति का मार्ग दिखाया। वक्ताओं ने कहा कि बुद्ध धम्म का मूल उद्देश्य मानव जीवन में करुणा, शांति और समानता स्थापित करना है।
🛑बाबा साहब के विचारों को किया गया याद

📌 सम्मेलन में डॉ. भीमराव अम्बेडकर के उस ऐतिहासिक संदेश को भी प्रमुखता से रखा गया, जिसमें उन्होंने शोषित, पीड़ित और उपेक्षित समाज को बुद्ध धम्म अपनाने की प्रेरणा दी थी। वक्ता ने कहा कि बाबा साहब ने बुद्ध धम्म में तीन महान सिद्धांत देखे—
📍प्रज्ञा — जो अंधविश्वास और अलौकिक मान्यताओं से मुक्ति दिलाती है।
📍 प्रेम — जो मानव-मानव के बीच कल्याणकारी संबंध स्थापित करता है।
📍समानता — जो न्यायपूर्ण और सुखी समाज की आधारशिला है।
🛑विपश्यना साधना से आत्मावलोकन का संदेश
धम्म सभा में श्रुत ज्ञान, चिंतन ज्ञान और भावना ज्ञान पर गहन चर्चा की गई। साधकों को विपश्यना साधना के माध्यम से आत्मावलोकन और परमार्थिक सत्य को समझने का अभ्यास कराया गया। वक्ता ने कहा कि भगवान बुद्ध द्वारा बताई गई साधना पद्धति का अनुकरण कर कोई भी व्यक्ति सांसारिक दुःखों से मुक्ति का मार्ग प्राप्त कर सकता है।
📌55 वर्षों की साधना पूर्ण करने वाले आर बी सिंह बने आकर्षण का केंद्र

📍कार्यक्रम में विशेष घोषणा करते हुए बताया गया कि साधना के 55 वर्ष पूर्ण कर चुके ध्यानी एवं ज्ञानी आर बी सिंह से कोई भी व्यक्ति अपने जीवन, साधना अथवा मानसिक और सांसारिक दुःखों से संबंधित प्रश्न पूछ सकता है। श्रद्धालुओं ने इसे समाज के लिए प्रेरणादायी पहल बताया।
🛑“आज के समय में बुद्ध धम्म सबसे बड़ा मार्ग”
👉प्रेस क्लब में वक्ता ने कहा कि आज का समाज तनाव, हिंसा और विभाजन की परिस्थितियों से गुजर रहा है। ऐसे समय में भगवान बुद्ध का धम्म मानवता को शांति, विवेक, करुणा और समानता की राह दिखाने वाला सबसे बड़ा मार्ग बनकर उभर रहा है।

