आईजीआरएस में लापरवाही से कानपुर की रैंकिंग धड़ाम, 21 अफसरों को डीएम का नोटिस

📉 दिसंबर में 75 जिलों में 73वें स्थान पर पहुंचा कानपुर
⚠️ शिकायतकर्ताओं से संवाद न करना और नकारात्मक फीडबैक बना बड़ी वजह
कानपुर।आईजीआरएस (एकीकृत शिकायत निवारण प्रणाली) पोर्टल पर दर्ज शिकायतों के निस्तारण में गंभीर लापरवाही के चलते कानपुर नगर जिले की रैंकिंग लगातार गिरती जा रही है। दिसंबर 2025 की रैंकिंग में कानपुर 75 जिलों में 73वें स्थान पर पहुंच गया, जिससे जिला प्रशासन में हड़कंप मच गया है।स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी जितेन्द्र कुमार सिंह ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने एसडीएम सदर, एसडीएम नर्वल सहित 21 अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। साथ ही सभी विभागीय नोडल अधिकारियों को चेतावनी दी गई है कि भविष्य में ऐसी लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
—📊 लगातार गिरती रैंकिंग बनी चिंता का कारणअक्टूबर 2025 : 63वां स्थाननवंबर 2025 : 70वां स्थानदिसंबर 2025 : 73वां स्थानलगातार गिरती रैंकिंग का मुख्य कारण शिकायतों के निस्तारण के बाद नकारात्मक फीडबैक आना बताया गया है।
—📌 आंकड़ों में लापरवाही की हकीकतदिसंबर 2025 में कुल 13,492 शिकायतें दर्ज7,142 शिकायतों पर मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा फीडबैक लिया गया3,340 शिकायतकर्ता निस्तारण से असंतुष्ट पाए गएफीडबैक मूल्यांकन में जिले को 140 में से केवल 113 अंक मिले
—❌ इन विभागों में निस्तारण की गुणवत्ता कमजोरजांच में पाया गया कि कई विभागों में शिकायत निस्तारण की प्रक्रिया बेहद कमजोर रही—केस्कोलोक निर्माण विभाग (PWD)मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) कार्यालयएसडीएम सदरएसडीएम नर्वलवन विभागबेसिक शिक्षा विभागकई मामलों में अधिकारियों ने शिकायतकर्ता से संपर्क किए बिना ही रिपोर्ट अपलोड कर दी, जिससे असंतोष बढ़ा।
—✅ सुधार के लिए डीएम के सख्त निर्देशजिलाधिकारी ने निर्देश दिए हैं कि—शिकायत निस्तारण से पहले शिकायतकर्ता से अनिवार्य संवाद किया जाएनियमित समीक्षा बैठकें आयोजित होंबिना सत्यापन के रिपोर्ट अपलोड करने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
—✍️ निष्कर्ष- आईजीआरएस रैंकिंग में गिरावट ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि डीएम के सख्त निर्देशों के बाद व्यवस्था में कितना सुधार आता है।

