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अंग्रेज़ों की कानून के नाम पर शोषणवादी संवैधानिक शासन व्यवस्था का नाश, रामराज्य की स्थापना द्वारा होगा संभव:- अखंड हिन्दूत्व राष्ट्र साम्राज्य सेना

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कानपुर। अखंड हिन्दूत्व राष्ट्र साम्राज्य सेना के संस्थापक , राष्ट्रीय अध्यक्ष बम बम महाराज नौहट्टिया एवं संस्थापक , राष्ट्रीय महासचिव अमोल दीक्षित बाबा ने कहा उत्तर प्रदेश की पावन भूमि से प्रभु श्रीराम के आदेश और आशीर्वाद को अंगीकार कर प्रभु श्रीराम के दूत के रूप में जननी जन्म भूमि की जीवन के हर पल पल पल सुरक्षा संरक्षा और सेवा करने की नियति के संकेत के तहत् यह महान ऐतिहासिक कार्य करने के लिए अग्रसर हुए हैं।
अनेकों लोग जिस आजादी और अधिकार के लिए लाखों मातृभूमि पर बलिदान हुए। जिस सनातन धर्म संस्कृति और सभ्यता की रक्षा के लिए गुरूओं सहित अने राजाओं ने अपनी आहुति देकर भारत को विद्रूप नहीं होने दिया उसी भारत को उसी श्री राम की भूमि को छद्म घुसपैठिये ने विद्रूपित ही नहीं किया बल्कि घोर बर्बरता के द्वारा महा नर संहार भी किया है। बाबजूद भारत को अपनी आजादी और अधिकार संपन्न गणतंत्र नहीं मिला। इस बिडंबना को ढोते हुए आज 76 साल की लंबी अवधी ने अब एक बार फिर हुंकार भरने के लिए बाध्य कर दिया है। एक बार फिर मातृभूमि के लिए राम के दूत के रूप में रावण और कृष्ण के दूत के रूप में कंस कौरव और अन्य सहित अन्य जो भारत को अपने छल कपट व्यभिचार सहित कुत्सित इरादों के साथ और अंग्रेज़ों के द्वारा अभिशापित कानून के नाम पर भारत को गारत कर दिया है उससे भारत को भारत की समस्त भारतीयों को को जो महा गुलामी का मकड़जाल में जकड़ दिया है इस महा गुलामी की मकड़जाल से निकालने वाले एक मात्र प्रभु श्रीराम और प्रभु श्रीराम का नाम और उसकी महिमा है जिसको सार्थक आज कानपुर की धरती से किया जा रहा है।
कानपुर की धरती साक्षी बनने जा रही है आपरेशन इंडिया भारत निर्माण का। कानपुर की धरती साक्षी बनने जा रही है आपरेशन गुलामी की शासन व्यवस्था का, कानून के नाम पर शोषण करने वाले षड्यंत्र कारी महा गुलामी की हर तदबीर का।
कानपुर की धरती आज आहवान कर रही है भारत में राम राज्य का और अखंड हिन्दूत्व राष्ट्र साम्राज्य सेना नाम की राजनीतिक दल का जिसके द्वारा भारत में समरस समाज की स्थापना करते हुए हर प्रकार का जातिवाद का जहर को दूर करते हुए हर प्रकार के धार्मिक उन्माद को समाप्त करते हुए मानव मानव एक समान की नियंता की रचना को साकार करते हुए एक ऐसे रामराज्य में भारत को लेकर आने का जिसमें हिन्दू का भी राम। मुस्लिम का भी राम। सिख का भी राम बौद्ध का भी राम। जैन का भी राम। राम सबका राम। रामं मय भारत। यही रामराज्य की स्थापना को लेकर 76 साल से जो कानून के नाम पर संविधान के नाम पर देश का शोषण उत्पीड़न सहित भारत की अस्तित्व और अस्मिता को निष्परायाण कर दिया गया है। उसका आपरेशन कर एक नयी सुशासन और अनुशासन को लेकर कानपुर की धरती मुखर हो चुकी है।
आज का दिन कानपुर की धरती को नमन बंदन अभिनंदन करने का है जो एक संपूर्ण आजादी और अधिकार का अलख इस अंग्रेजों की कापी पेस्ट शासन व्यवस्था और संविधान के खिलाफ जगा दिया है।
रामराज्य के द्वारा ही देश में सब खुशहाल होगा। आखिर कहा भी गया है कि- दैहिक दैविक भौतिक तापा राम राज्य काहु नहीं व्यापा।
आगे चैत्र नवमी को राजा राम अवध राजधानी के लिए आह्वान करते हुए राजनीतिक दल के रूप में निबंधित करने संबंधित अन्य कार्यों का समापन किया जाएगा और देश समाज के लिए इस नये राजनीतिक दल द्वारा जो भी काम किए जाऐंगे उसे रखा जाएगा।

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