लोकल गुटबाजी से परेशान सपा नेतृत्व ने निकाला ‘बाहरी प्रत्याशी’ का फॉर्मूला

📌यमुना तीरे के बड़े नेता गंगा तट से ठोक सकते हैं चुनावी ताल
📍कभी हाथी की सवारी, फिर हाथ का साथ और अब साइकिल हुई प्यारी
📌छावनी संग्राम के समर में सपा से कूदेंगे आयातित नेता
कानपुर। विधानसभा चुनाव की आहट तेज होते ही कानपुर की राजनीति में हलचल बढ़ गई है। सभी दलों में टिकट की दावेदारी, अंदरूनी खींचतान और जीताऊ चेहरों की तलाश शुरू हो चुकी है। भाजपा के प्रदेश नेतृत्व की सक्रियता के बाद विपक्षी दलों ने भी अपने-अपने राजनीतिक समीकरण साधने शुरू कर दिए हैं।शहर की राजनीति में सबसे अधिक चर्चा इस समय समाजवादी पार्टी की छावनी विधानसभा सीट को लेकर है। वर्ष 2022 के चुनाव में भाजपा के मजबूत गढ़ मानी जाने वाली इस सीट पर सपा ने जीत दर्ज कर राजनीतिक समीकरण बदल दिए थे। मुस्लिम बहुल क्षेत्र होने के कारण राजनीतिक विश्लेषकों ने पहले ही इस सीट को सपा के पक्ष में माना था और पार्टी प्रत्याशी हसन रूमी ने जीत हासिल कर पार्टी का परचम लहराया था।हालांकि विधायक बनने के बाद रूमी लगातार विवादों और संगठनात्मक असंतोष से घिरे रहे। कभी पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप लगे तो कभी स्थानीय नेताओं से टकराव की चर्चाएं सामने आईं। यही वजह है कि आगामी विधानसभा चुनाव में उनके टिकट को लेकर पार्टी के भीतर संशय की स्थिति बनी हुई है।
🛑लखनऊ दरबार में बढ़ी टिकट की दौड़
सपा सूत्रों की मानें तो छावनी सीट पर टिकट के दावेदारों की सूची लगातार लंबी होती जा रही है। कई स्थानीय नेता तो कई बाहरी चेहरे भी अपनी दावेदारी मजबूत करने में जुटे हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि कुछ दावेदार बड़े नेताओं और प्रभावशाली व्यक्तियों के जरिए पार्टी नेतृत्व तक अपनी पैरवी कराने में लगे हुए हैं।पार्टी के एक वरिष्ठ नेता के अनुसार, “छावनी सीट केवल एक विधानसभा क्षेत्र नहीं, बल्कि आसपास की कई सीटों के चुनावी समीकरणों को प्रभावित करने वाली सीट है। इसलिए पार्टी नेतृत्व यहां किसी ऐसे चेहरे को उतारना चाहता है जो संगठनात्मक गुटबाजी से ऊपर हो और व्यापक राजनीतिक प्रभाव रखता हो।

🛑”‘आयातित नेता” पर दांव लगाने की तैयारी
सूत्र बताते हैं कि सपा नेतृत्व छावनी सीट पर किसी ऐसे नेता को उतारने की रणनीति पर काम कर रहा है, जिसका राजनीतिक प्रभाव केवल कानपुर तक सीमित न हो। चर्चा है कि यमुना किनारे की राजनीति से जुड़े एक कद्दावर नेता को गंगा तट की इस सीट से चुनाव मैदान में उतारा जा सकता है।दिलचस्प बात यह है कि संभावित नेता का राजनीतिक सफर भी कम रोचक नहीं रहा है। कभी बसपा की राजनीति में सक्रिय रहे, फिर कांग्रेस का दामन थामा और अब समाजवादी खेमे में मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं। ऐसे में राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा जोरों पर है कि सपा नेतृत्व स्थानीय गुटबाजी को समाप्त करने के लिए किसी बाहरी लेकिन प्रभावशाली चेहरे पर दांव खेल सकता है।
📌पांच से दस सीटों का समीकरण साधने की कोशिश
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि सपा छावनी सीट पर किसी बड़े बाहरी चेहरे को उतारती है तो इसका असर केवल एक सीट तक सीमित नहीं रहेगा। पार्टी आसपास की पांच से दस विधानसभा सीटों पर भी इसका लाभ लेने की रणनीति बना रही है।
📍एक वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक का कहना है—>
“छावनी सीट पर उम्मीदवार का चयन केवल स्थानीय जीत-हार का सवाल नहीं है। सपा नेतृत्व ऐसा चेहरा तलाश रहा है जो संगठन को एकजुट करने के साथ-साथ क्षेत्रीय स्तर पर भी चुनावी माहौल बना सके।
🛑”क्या कटेगा मौजूदा विधायक का टिकट?
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या मौजूदा विधायक का टिकट कटेगा या पार्टी एक बार फिर उन पर भरोसा जताएगी। हालांकि संगठन के भीतर चल रही चर्चाएं और बढ़ती दावेदारियों को देखकर इतना तय माना जा रहा है कि छावनी सीट पर इस बार मुकाबला केवल विपक्ष से नहीं, बल्कि टिकट की दौड़ में शामिल नेताओं के बीच भी दिलचस्प रहने वाला है।
👉(नोट: यह समाचार राजनीतिक सूत्रों, संगठनात्मक चर्चाओं और क्षेत्रीय राजनीतिक विश्लेषण पर आधारित है। प्रत्याशी चयन का अंतिम निर्णय संबंधित राजनीतिक दल द्वारा आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगा।)

