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मंदिर जा रहे दंपति को रफ्तार ने निगला

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ट्रक ने रौंदा, सड़क पर तड़पते रहे, सिस्टम सोता रहा

कानपुर। शहर की सड़कों पर बेलगाम रफ्तार एक बार फिर दो जिंदगियां निगल गई। शनिवार सुबह आस्था का सफर मातम में बदल गया, जब सिद्धनाथ मंदिर दर्शन को निकले बुजुर्ग दंपति को एक तेज रफ्तार ट्रक ने कुचल दिया। हादसा इतना भयावह था कि दोनों ने सड़क पर तड़पते हुए महज पांच मिनट में दम तोड़ दिया — और तमाशबीन सिस्टम मूकदर्शक बना रहा।

सीताराम नगर निवासी 62 वर्षीय लक्ष्मीकांत शर्मा, जो नगर निगम से रिटायर्ड सुपरवाइजर थे, अपनी पत्नी आशा देवी (56) के साथ स्कूटी से मंदिर जा रहे थे। जाजमऊ के सोलंकी धर्मकांटे के पास पहुंचते ही पीछे से आए मौत के सौदागर ट्रक ने उन्हें बेरहमी से रौंद डाला। सड़क खून से लाल हो गई, लेकिन शहर की ट्रैफिक व्यवस्था की पोल भी खुल गई।

स्थानीय लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। मौके पर ही ट्रक को रोक लिया गया और चालक की जमकर पिटाई कर उसे पुलिस के हवाले कर दिया गया। सवाल यह है कि आखिर कब तक सड़कों पर ऐसे हत्यारे वाहन यूं ही दौड़ते रहेंगे और निर्दोष लोग अपनी जान गंवाते रहेंगे?

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दो बेटों का सहारा छिन गया, एक परिवार उजड़ गया — लेकिन क्या जिम्मेदारों की नींद खुलेगी? या फिर हर बार की तरह यह हादसा भी फाइलों में दफन होकर रह जाएगा?

पुलिस ने दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है, लेकिन शहर पूछ रहा है — मौत की इस रफ्तार पर आखिर लगाम कब लगेगी?
बिंदास बोल कानपुर से राजू गौड की रिपोर्ट

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