दो मासूम बच्चियों संग दर-दर भटक रही विधवा

— सिस्टम बना बहरा, अफसर मौन!
कानपुर। योगीराज में न्याय की बातें भले मंचों से गूंजती हों, लेकिन जमीनी हकीकत एक बार फिर सवालों के घेरे में है। कानपुर नगर के आरटीओ ऑफिस से लेकर एसीपी कल्याणपुर के दफ्तर तक एक बेबस विधवा महिला अपनी दो मासूम बच्चियों को साथ लेकर दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर है, लेकिन सुनवाई के नाम पर उसे सिर्फ निराशा ही हाथ लग रही है।
पीड़िता का आरोप है कि उसके दिवंगत पति द्वारा कानपुर आरटीओ में वाहन ट्रांसफर कराया गया था, लेकिन आज वही मामला एक उलझी हुई पहेली बनकर रह गया है। जांच रिपोर्ट तैयार होने के बावजूद न तो उसे जानकारी दी जा रही है और न ही कोई अधिकारी जवाब देने को तैयार है।
बार-बार दफ्तरों के चक्कर काटने के बावजूद महिला को हर जगह सिर्फ टालमटोल और चुप्पी मिल रही है। सवाल यह उठता है कि आखिर एक विधवा और उसकी मासूम बच्चियों की फरियाद सुनने वाला कौन है? क्या सरकारी दफ्तरों के दरवाजे सिर्फ दिखावे के लिए खुले हैं?
यह मामला सिर्फ एक महिला की पीड़ा नहीं, बल्कि उस सिस्टम की सच्चाई उजागर करता है जहां आम जनता की आवाज फाइलों में दबकर रह जाती है और जिम्मेदार अफसर खामोशी की चादर ओढ़ लेते हैं।
अगर जल्द ही इस मामले में कार्रवाई नहीं होती, तो यह प्रशासन की संवेदनहीनता का एक और काला अध्याय बन जाएगा।
बिंदास बोल कानपुर से राजू गौड़ की रिपोर्ट
