गैस एजेंसियों का नया खेल? बुकिंग और डिलीवरी दिखाकर हो रही कालाबाजारी

कानपुर। एलपीजी गैस को लेकर एक चौंकाने वाला मामला सामने आ रहा है, जिसने उपभोक्ताओं की परेशानी और प्रशासन की चिंता दोनों को बढ़ा दिया है। शहर के कई इलाकों से लगातार शिकायतें मिल रही हैं कि गैस एजेंसियां कथित तौर पर कालाबाजारी का नया तरीका अपना रही हैं।मोबाइल पर बुकिंग और डिलीवरी का मैसेज, लेकिन घर तक नहीं पहुंच रहा सिलेंडरउपभोक्ताओं का कहना है कि उनके मोबाइल फोन पर अचानक गैस सिलेंडर बुक होने का मैसेज आ जाता है, जबकि उन्होंने स्वयं कोई बुकिंग नहीं की होती। इसके बाद अगले ही दिन एक और मैसेज प्राप्त होता है जिसमें सिलेंडर की डिलीवरी दिखा दी जाती है।हैरानी की बात यह है कि जब उपभोक्ता गैस लेने के लिए एजेंसी पर पहुंचते हैं, तो उन्हें बताया जाता है कि उनके नाम पर पहले ही सिलेंडर डिलीवर हो चुका है। ऐसे में उपभोक्ता खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।एजेंसियों पर लंबी लाइनें, तीन-तीन दिन तक नहीं मिल रही गैसशहर की विभिन्न गैस एजेंसियों के बाहर लंबी-लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं। कई उपभोक्ताओं का कहना है कि उन्हें लगातार दो से तीन दिनों तक एजेंसी के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं, इसके बावजूद उन्हें गैस सिलेंडर नहीं मिल पा रहा है। इससे आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है, खासकर मध्यमवर्गीय और निम्नवर्गीय परिवारों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।आपूर्ति पर्याप्त, फिर भी संकट क्यों? उठ रहे गंभीर सवालसूत्रों के अनुसार, बीते दिनों बड़ी संख्या में एलपीजी सिलेंडरों की बुकिंग हुई है और गैस एजेंसियों को पर्याप्त आपूर्ति भी की गई है। इसके बावजूद उपभोक्ताओं को गैस नहीं मिल पाना कई सवाल खड़े करता है।सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब रिकॉर्ड में बुकिंग और डिलीवरी दोनों दिख रही हैं, तो आखिर यह गैस जा कहां रही है? क्या यह सिलेंडर खुले बाजार में ऊंचे दामों पर बेचे जा रहे हैं?कालाबाजारी की आशंका, जांच की मांग तेजउपभोक्ताओं और स्थानीय लोगों ने इस पूरे मामले में कालाबाजारी और भ्रष्टाचार की आशंका जताई है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगाई गई, तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।जनता ने जिला प्रशासन और संबंधित विभाग से इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। साथ ही दोषी गैस एजेंसियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की भी अपील की गई है, ताकि आम उपभोक्ताओं को राहत मिल सके और व्यवस्था में पारदर्शिता बनी रहे।प्रशासन की भूमिका पर नजरअब देखना यह होगा कि प्रशासन इस गंभीर मामले को कितनी प्राथमिकता से लेता है और जांच के बाद क्या कार्रवाई की जाती है। फिलहाल, कानपुर नगर के उपभोक्ता गैस संकट और अनियमितताओं के बीच जूझ रहे हैं, और उन्हें जल्द राहत मिलने की उम्मीद है।
*बिंदास बोल कानपुर से राजू गौड़ की रिपोर्ट*

