योगी राज में एसजीएसटी दफ्तर पर ‘सपा राज’ का साया

📌वर्षों से एक ही पटल पर जमे कर्मचारियों-अधिकारियों के खिलाफ शिकायतों की बाढ़, पूर्व मंत्री के रिश्तेदार अधिकारी पर भी उठे सवाल
कानपुर।राज्य कर विभाग कार्यालय में सालों से एक ही पद और पटल पर जमे हैं कई कर्मचारी और अधिकारीसपा के पूर्व कैबिनेट मंत्री के रिश्तेदाऔर अधिकारी पर ट्रांसफर-पोस्टिंग में नियमों की अनदेखी का आरोपहालिया तबादलों के बाद मुख्यमंत्री से लेकर प्रमुख सचिव तक भेजे गए शिकायती पत्रकानपुर। लखनपुर स्थित राज्य कर (एसजीएसटी) विभाग के क्षेत्रीय कार्यालय में स्थानांतरण नीति को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। हाल ही में जारी हुई ट्रांसफर सूची के बाद विभागीय कर्मचारियों, अधिवक्ताओं और ट्रांसपोर्ट कारोबारियों द्वारा मुख्यमंत्री कार्यालय, प्रमुख सचिव राज्य कर, आयुक्त और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को कई शिकायती पत्र भेजे गए हैं। इन शिकायतों में आरोप लगाया गया है कि वर्षों से एक ही पद ़ पटल पर जमे कर्मचारी एवं अधिकारी विभागीय नियमों की खुलेआम अवहेलना कर रहे हैं।शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि ट्रांसफर-पोस्टिंग की प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव है और जातिवाद, भाई-भतीजावाद तथा कथित आर्थिक लेनदेन के आधार पर मनचाही तैनातियां दी जाती हैं। शिकायतों में दर्जनों कर्मचारियों और अधिकारियों के नामों का उल्लेख करते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की गई है।इन आरोपों के केंद्रय् में संयुक्त आयुक्त देवेंद्र सिंह यादव का नाम भी सामने आया है, जो बी-रेंज के कार्यपालक अधिकारी हैं। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि वह समाजवादी पार्टी सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे वरिष्ठ नेता दुर्गा प्रसाद यादव के रिश्तेदार हैं। आरोप है कि राजनीतिक संरक्षण के चलते उनके खिलाफ लगातार शिकायतें होने के बावजूद विभागीय स्तर पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की जा रही है।शिकायतों में यह भी कहा गया है कि उनके निकट सहयोगी माने जाने वाले संजीव अवस्थी, जो अपर आयुक्त ग्रेड-1 कार्यालय, जोन प्रथम में वरिष्ठ सहायक के पद पर कार्यरत हैं, पिछले लगभग पांच वर्षों से एक ही पटल पर बने हुए हैं। आरोप है कि विभागीय कार्यों में प्रभाव का उपयोग कर आर्थिक लाभ अर्जित किया जाता है।इसके अलावा हिमांशु यादव, तुषार श्रीवास्तव, रवि वर्मा, जितेंद्र मिश्रा, दीपक शर्मा, प्रवीण शुक्ला, साधना सिंह, विदिशा दयाल, दीपिका पाल, मयंक तथा अंजनी समेत कई कर्मचारियों के नाम शिकायतों में शामिल बताए गए हैं। आरोप है कि इनमें से कई कर्मचारी वरिष्ठ सहायक, कनिष्ठ सहायक, स्टेनो और नाजिर जैसे पदों पर चार से दस वर्षों से एक ही कार्यालय में तैनात हैं।शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यदि विभागीय स्थानांतरण नीति का निष्पक्ष पालन किया जाए तो लंबे समय से एक ही स्थान पर जमे अधिकारियों और कर्मचारियों को तत्काल हटाया जाना चाहिए। मामले को लेकर विभागीय गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज है और अब निगाहें शासन स्तर पर होने वाली संभावित कार्रवाई पर टिकी हैं।
🟥 प्राइवेट ड्राइवरों के सहारे करोड़ों की वसूली का आरोप, सीएम तक पहुंची शिकायत
📌👉 विभाग में प्राइवेट ड्राइवरों का वसूली नेक्सस!एसजीएसटी कानपुर कार्यालय के सचल दलों में संचालित सरकारी वाहनों को कथित रूप से निजी ड्राइवरों के हवाले कर बड़े पैमाने पर अवैध वसूली का नेटवर्क चलाए जाने का आरोप लगाया गया है। यह आरोप एक ट्रांसपोर्ट कारोबारी द्वारा मुख्यमंत्री कार्यालय, विभागीय सचिव और आयुक्त को भेजे गए शिकायती पत्र में लगाए गए हैं।शिकायतकर्ता का दावा है कि सड़कों पर चेकिंग के दौरान टैक्स चोरी में संलिप्त मालवाहक वाहनों को कथित रूप से धनराशि लेकर छोड़ा जाता है, जिससे सरकारी राजस्व को भारी नुकसान पहुंचता है। पत्र में कई निजी ड्राइवरों के नाम और मोबाइल नंबर तक दर्ज किए गए हैं तथा पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कराए जाने की मांग की गई है।शिकायतकर्ता के अनुसार यह नेटवर्क लंबे समय से सक्रिय है और इसमें विभागीय संरक्षण मिलने की भी आशंका जताई गई है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है। मामले की सत्यता जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी है।
🟥 जब सीबीआई ने खोला था केशवलाल का खजाना, फिर चर्चा में आया एसजीएसटी कार्यालय
,📌👉याद आ गए महाभ्रष्टाचारी केशवलाल!एसजीएसटी कार्यालय पर लगे ताजा आरोपों ने कुछ वर्ष पूर्व चर्चित रहे तत्कालीन एडिशनल कमिश्नर ग्रेड-2 केशवलाल के मामले की याद ताजा कर दी है। उस समय केंद्रीय जांच एजेंसी (सीबीआई) की कार्रवाई के बाद केशवलाल को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था।मामले में आरोप था कि विभागीय पद का दुरुपयोग कर बड़े स्तर पर टैक्स चोरी को संरक्षण दिया गया। जांच के दौरान भारी मात्रा में नकदी और सोने की बरामदगी की खबरों ने पूरे प्रदेश में सनसनी फैला दी थी।विभागीय सूत्रों और शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यदि वर्तमान आरोपों की भी निष्पक्ष जांच कराई जाए तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ सकते हैं। उनका कहना है कि राज्य कर विभाग में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए लंबे समय से एक ही स्थान पर जमे अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की भी समीक्षा आवश्यक है।—(नोट : समाचार में लगाए गए सभी आरोप शिकायत पत्रों और शिकायतकर्ताओं के दावों पर आधारित हैं। संबंधित अधिकारियों या विभाग का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।)

