जनपद आगरा में शराब का आतंक : महिलाओं की सुरक्षा पर संकट
रुपेश सिंह की रिपोर्ट | बिंदास बोल न्यूज़
शराब ठेकों के बाहर बढ़ता उत्पातजनपद आगरा में कम्पोजिट शराब की दुकानों के बाहर आए दिन शराबी तत्वों का उत्पात बढ़ता जा रहा है। ठेकों पर भीड़ लगाकर नशेड़ी खुलेआम शराब पीते हैं और फिर राह चलती महिलाओं एवं युवतियों से अभद्र व्यवहार, छींटाकशी और छेड़छाड़ करते हैं।ये हालात अब स्थानीय लोगों और परिवारों के लिए गंभीर चिंता का विषय बन चुके हैं।
महिलाओं की सुरक्षा पर सबसे बड़ा खतराठेकों के आसपास का माहौल इतना असुरक्षित हो चुका है कि कॉलेज जाने वाली छात्राएँ और दफ्तर आने-जाने वाली महिलाएँ उस रास्ते से गुजरने से कतराती हैं।शराबियों के अभद्र हावभाव और गंदी टिप्पणियाँ महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुँचा रही हैं। कई बार महिलाएँ मजबूरी में चुपचाप अपमान सहकर निकल जाती हैं क्योंकि विरोध करने पर गाली-गलौज और धमकी का सामना करना पड़ता है।
कानून-व्यवस्था की खुली चुनौतीनियम के मुताबिक, किसी भी कम्पोजिट शराब दुकान के बाहर खुलेआम शराब पीना अपराध है। लेकिन पुलिस-प्रशासन की उदासीनता और शराब माफियाओं की सांठगांठ के कारण ये ठेके शराबखोरी और उपद्रव के अड्डे में बदल चुके हैं।स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार शिकायतें की गईं लेकिन कार्रवाई केवल कागज़ों तक ही सीमित रह जाती है।
जनता में आक्रोशइलाके के निवासी अब इन ठेकों को हटाने और सख्त कार्रवाई की माँग पर एकजुट हो रहे हैं।अभिभावकों का कहना है कि अगर प्रशासन ने जल्द कदम नहीं उठाए, तो वे सड़क पर उतरकर आंदोलन करने को मजबूर होंगे।लोगों का कहना है – “महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान से बड़ा कोई मुद्दा नहीं हो सकता।”
आवश्यक कदम (जनता की मांग)शराब ठेकों के बाहर 24 घंटे पुलिस पिकेट की व्यवस्थासार्वजनिक स्थलों पर शराब पीने वालों पर त्वरित गिरफ्तारीअव्यवस्था फैलाने वाले ठेकों के लाइसेंस का निरस्तीकरणमहिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सीसीटीवी और हेल्पलाइन सिस्टम का सुदृढ़ीकरण
यह मुद्दा अब सिर्फ शराब बिक्री का नहीं, बल्कि महिलाओं की गरिमा और आम जनता की सुरक्षा का है।अगर प्रशासन ने समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए, तो आगरा का माहौल अराजकता और असुरक्षा में डूब जाएगा।
किसान नेता श्रवण सिंह भदौरिया,राष्ट्रीय मुख्य सचिव, भारतीय किसान यूनियन महाशक्ति बाह, आगरा

