कानपुर सेंट्रल के पार्सल ऑफिस में ‘कमीशनबाजी’ का खेल!
🚨 कानपुर सेंट्रल के पार्सल ऑफिस में ‘कमीशनबाजी’ का खेल! करोड़ों के राजस्व पर भ्रष्टाचार का साया?
कानपुर। उत्तर मध्य रेलवे (NCR) के सबसे अधिक राजस्व देने वाले कानपुर सेंट्रल स्टेशन के पार्सल एवं कमर्शियल विभाग पर गंभीर आरोप लगे हैं। विभाग के कुछ अधिकारियों पर अवैध वसूली, व्यापारियों को प्रताड़ित करने तथा रेलवे को करोड़ों रुपये के राजस्व नुकसान पहुंचाने के आरोप लगाते हुए एनसीआर मुख्यालय प्रयागराज तथा जीएम कार्यालय में लिखित शिकायत भेजी गई है। शिकायतकर्ताओं ने पूरे मामले की स्वतंत्र विजिलेंस जांच कराने की मांग की है।
क्या हैं प्रमुख आरोप?
- कमर्शियल विभाग के कुछ अधिकारियों पर अवैध वसूली कराने का आरोप।
- व्यापारियों से प्रति गांठ एवं प्रति बोरा निर्धारित दर से कथित कमीशन वसूले जाने का दावा।
- विरोध करने वाले व्यापारियों का माल रोककर आर्थिक नुकसान पहुंचाने का आरोप।
- रेलवे को करोड़ों रुपये के संभावित राजस्व नुकसान का दावा।
- लीज बोगियों के व्यापारियों से नियमित अवैध वसूली का आरोप।
सोशल मीडिया वीडियो से बढ़ा विवाद
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर वायरल एक वीडियो में पार्सल कार्यालय के बाहर व्यापारियों को हंगामा करते देखा गया। वीडियो में कुछ व्यापारी कथित अवैध वसूली के आरोप लगाते दिखाई देते हैं। हालांकि रेलवे प्रशासन का कहना है कि वायरल वीडियो पुराना है और वर्तमान जांच से उसका कोई संबंध नहीं है।
“जांच स्थानीय अधिकारियों से हटाकर रेलवे विजिलेंस अथवा बाहरी स्वतंत्र अधिकारी से कराई जाए, ताकि निष्पक्ष जांच संभव हो सके।”
डेमरेज और बिना मार्के वाले माल पर भी सवाल
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि प्लेटफॉर्म नंबर 1 तथा प्लेटफॉर्म नंबर 9 स्थित पार्सल गोदामों में कई दिनों तक बिना मार्का एवं बिना मुहर वाला माल पड़ा रहता है। जबकि रेलवे नियमों के अनुसार निर्धारित समय के बाद डेमरेज शुल्क लगाया जाना चाहिए। आरोप है कि मिलीभगत से डेमरेज नहीं लगाया जाता और गेट पास बनाने में भी कथित अवैध वसूली होती है।
राजस्व पर असर की आशंका
- होजरी एवं रेडीमेड की प्रत्येक गांठ पर कथित 8-15 रुपये वसूली।
- पान मसाला के प्रत्येक बोरे पर कथित 15-20 रुपये वसूली।
- लीज बोगियों से जुड़े व्यापारियों से नियमित बंधी रकम लिए जाने का आरोप।
- अवैध वसूली के कारण व्यापारी रेलवे छोड़कर अन्य परिवहन माध्यम अपनाने को मजबूर हो रहे हैं।
रेलवे अधिकारी का पक्ष
“यदि शिकायतकर्ता नियुक्त अधिकारी से जांच नहीं चाहता है, तो जांच किसी अन्य अधिकारी को सौंप दी जाएगी। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो पुराना है और वर्तमान मामले से उसका कोई संबंध नहीं है।”
पृष्ठभूमि
रेलवे में पूर्व में भी विभिन्न मामलों में वित्तीय अनियमितताओं एवं विजिलेंस जांच के प्रकरण सामने आ चुके हैं। ऐसे मामलों में रेलवे प्रशासन द्वारा जांच कराई जाती रही है। 0
अब निगाहें किस पर?
व्यापारियों की मांग है कि पूरे मामले की जांच उत्तर मध्य रेलवे मुख्यालय के स्वतंत्र विजिलेंस अधिकारियों से कराई जाए ताकि आरोपों की सत्यता सामने आ सके और यदि किसी स्तर पर भ्रष्टाचार हुआ है तो जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जा सके। फिलहाल शिकायत पर रेलवे प्रशासन की अगली कार्रवाई का इंतजार है।
Disclaimer: इस समाचार में उल्लिखित आरोप शिकायतकर्ताओं एवं व्यापारियों द्वारा लगाए गए हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित रेलवे अधिकारी ने अपना पक्ष भी सार्वजनिक रूप से रखा है। अंतिम निष्कर्ष सक्षम जांच के बाद ही सामने आएगा।

