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जेल के अंदर रहते हिस्ट्रीशीटर ने वसूली रंगदारी!

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  • एफआईआर में खुलासा: कानपुर जिला कारागार में निरूद्ध रहते अंदर से फोन कॉलें करके वारदात अंजाम दी!
  • जेल में सेलफोन के इस्तेमाल के आरोप को गंभीरता से नहीं लिया पुलिस-प्रशासन ने!

कानपुर। बिहार में लालू यादव के जंगलराज की याद दिलाकर पीएम मोदी, सीएम योगी और नितीश कुमार नीत एनडीए गठबंधन एक बार फिर से सत्ता पर काबिज हो गया है। तब अपराधी बिहार की जेलों से भी अपने अपराध की सत्ता बेधड़क चलाते थे। कानपुर नगर जिले में तो आज की तारीख में कुछ ऐसा ही होने के बात सामने आई है। खुद कानपुर कमिश्नरेट पुलिस द्वारा अनवरगंज थाने में दर्ज की गई एफआईआर संख्या 95/2025 में इस बात का खुलासा हुआ है कि शहर के कुख्यात नटोरियस हिस्ट्रीशीटर एजाजुद्दीन उर्फ सबलू ने भी कानपुर जेल के अंदर से मोबाइल फोन का इस्तेमाल करके, जानमाल की धमकी देकर रंगदारी वसूली

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हिस्ट्रीशीटर सबलू वसूली के आरोप में कुछ दिन पहले कानपुर जिला कारागार में निरूद्ध हुआ था। यहां उसने अपने साथ ही बंद एक प्रतिद्वंदी हिस्ट्रीशीटर मोहम्मद नावेद उर्फ शाहिद पिच्चा को जेल के अंदर ही कथित तौर पर डराया धमकाया। आरोप है कि जेल से ही प्रतिद्वंदी हिस्ट्रीशीटर शाहिद पिच्चा के परिजनों को कई बार फोन करके 5 लाख की रंगदारी मांगी। शाहिद पिच्चा के जीजा सनी मौरंग की पत्नी रहनुमा बानो द्वारा 16 नवंबर को दर्ज करवाई गई एफआईआर के अनुसार जेल के अंदर रहते हुये ही नटोरियस सबलू ने उसके देवरों, यानि पिच्चा के भाइयों कई बार धमकाया। फिर सबलू ने अपने हिस्ट्रीशीटर गुर्गे शानू लफ्फाज, इरफान चूड़ी आदि भेजकर शाहिद पिच्चा के भाई सकलैन से रंगदारी की रकम वूसल भी ली। तहरीर में अक्टूबर के तीसरे हफ्ते में जेल के अंदर से सबलू द्वारा की गई फोन कॉलों का समय और फोन नंबर भी दिया गया, इसके बावजूद पुलिस उच्चाधिकारियों ने जेल के अंदर से कॉल करके रंगदारी वसूले जाने जैसे गंभीर आरोपों का ना तो संज्ञान लिया और ना ही जेल प्रशासन को ही इस बाबत कोई इंटीमेशन दिया। जबकि सबलू, उसके भाई, इरफान समेत पांच नामजदों में से एक, इरफान चूड़ी गिरफ्तार भी हो चुका है।
दरअसल कुछ महीने पहले सबलू को गोली मारकर हत्या का प्रयास हुआ था। मामले में सबलू ने अपने प्रतिद्वंदी हिस्ट्रीशीटर शाहिद पिच्चा और उसके साथियों को नामजद किया था। जो बाद में जेल भेजे गये थे। तहरीर के अनुसार सबलू जेल में ही शाहिद को धमकी दे रहा था कि पांच लाख रंगदारी दे दे, नहीं तो वो उसकी बेल नहीं होने देगा। इसी वसूली के लिये आरोप है कि सबलू ने अंदर से पिच्चा के परिजनों को कई बार फोन कॉल किये।
कानपुर जेल में अखिलेश दुबे जैसे चर्चित शातिर भी निरूद्ध हैं। उनपर भी जेल के अंदर से पीड़ितों को धमकाने के आरोप लग रहे हैं। सीनियर क्रिमिनल लॉयर संजय मिश्रा कहते हैं कि जेल के अंदर से सेलफोन का प्रयोग करके रंगदारी वसूलने जैसे आरोपों पर तो पुलिस को ही सीबीसीआईडी जांच रिकमेंड करनी चाहिये थी, वर्ना आम आदमी सुरक्षित नहीं। पुलिस को अधिक संवेदनशीलता दिखानी चाहिये थी। बीते 8 अगस्त को कानपुर जेल से असरूद्दीन नाम का हत्यारोपी भी जेल की दीवार फांद कर फरार हो गया। मामले में जेलर, डिप्टी जेलर समेत कई सस्पेंड करके डीआईजी जेल को जांच दी गई हैं।

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जेल में ‘पीसीओ सुविधा’ उपलब्ध, मोबाइल नहीं: जेल अधीक्षक डॉ. बीडी पांडेय

कानपुर जिला कारागार अधीक्षक डॉ. बीडी पांडेय जेल के अंदर सख्त सुरक्षा के बीच सेलफोन के इस्तेमाल के आरोपों को हास्यापद बताते हैं। वो कहते हैं कि तहरीर में ऐसे बेबुनियाद आरोप दो हिस्ट्रीशीटरों की आपसी रंजिश के कारण लगाये गये। डॉ. पांडेय के अनुसार कानपुर समेत यूपी की अधिकांश जेलों में लैंड लाइन पैर्टन वाले पीसीओ हैं। बंदियों से दो फोन नंबर लिये जाते हैं। उन नंबरों का डिटेल्ड पुलिस वैरिफिकेशन करवाया जाता है। उसके बाद ही कड़ी निगरानी में बंदी पीसीओ से परिजन को हफ्ते में अधिकतम तीन बार कॉल कर सकता है। करोना काल में मिलाई बंद होने के कारण इन पीसीओ का अधिकतम उपयोग हुआ था।

कानपुर से सुनीत पान्डे की रिपोर्ट ✍️

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