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सावधान! सड़कों पर घूम रहे हैं ‘गैंग्स ऑफ एसजीएसटी’ ?

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📍सरकारी सचल दल की गाड़ियों पर निजी ड्राइवरों का कब्जा,

📍व्यापारी ने लगाया करोड़ों की वसूली और ‘पासर सिस्टम’ चलाने का आरोप

कानपुर। उत्तर प्रदेश के राज्य कर (एसजीएसटी) विभाग पर पहले स्थानांतरण नीति की अनदेखी और वर्षों से एक ही पद पर जमे अधिकारियों-कर्मचारियों को लेकर सवाल उठते रहे हैं। अब विभाग के कानपुर जोनल कार्यालय से जुड़ा एक और गंभीर मामला सामने आया है। एक व्यापारी ने मुख्यमंत्री कार्यालय से लेकर विभाग के शीर्ष अधिकारियों तक शिकायत भेजकर आरोप लगाया है कि विभाग के सचल दल (मोबाइल स्क्वॉड) की सरकारी गाड़ियां निजी ड्राइवरों के हवाले कर दी गई हैं और इन्हीं के माध्यम से सड़कों पर अवैध वसूली का संगठित खेल संचालित किया जा रहा है।किदवई नगर, साइट नंबर-1 निवासी व्यापारी प्रशांत मिश्रा द्वारा भेजे गए शिकायती पत्र में दावा किया गया है कि कानपुर स्थित एसजीएसटी कार्यालय के विभिन्न सचल दलों की सरकारी गाड़ियों का संचालन निजी व्यक्तियों द्वारा कराया जा रहा है। आरोप है कि ये निजी चालक प्रवर्तन दल के कुछ कर्मियों के साथ मिलकर मालवाहक वाहनों को रोकते हैं और कार्रवाई का भय दिखाकर वसूली करते हैं।

🧖शिकायतकर्ता के अनुसार, इस कथित नेटवर्क का उद्देश्य विभागीय अधिकारियों को सीधे सामने आने से बचाना है, जबकि वास्तविक कार्रवाई और संपर्क का काम निजी लोग संभालते हैं। पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि इस व्यवस्था के जरिए प्रतिदिन लाखों रुपये और प्रतिमाह करोड़ों रुपये तक की अवैध वसूली की जाती है।

🛑शिकायत में नाम, नंबर और वाहन विवरण तक दर्ज

🧖प्रशांत मिश्रा का दावा है कि उन्होंने अपनी शिकायत के साथ कानपुर एसजीएसटी कार्यालय के 13 सचल दलों से जुड़े वाहनों के नंबर, उन्हें संचालित करने वाले कथित निजी ड्राइवरों के नाम और मोबाइल नंबर तक उपलब्ध कराए हैं। इतना ही नहीं, शिकायत में कई ट्रांसपोर्ट कंपनियों और कथित टैक्स चोरी से जुड़े कारोबारियों के नामों का भी उल्लेख किया गया है।

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👨‍💼शिकायतकर्ता का आरोप है कि विभाग से जुड़े कुछ निजी चालक और उनके सहयोगी इतनी बड़ी आर्थिक ताकत हासिल कर चुके हैं कि वे करोड़ों की संपत्तियों के मालिक बन चुके हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हो सकी है।

🔴‘पासर सिस्टम’ से टैक्स चोरों को संरक्षण देने का आरोप

📍शिकायती पत्र का सबसे गंभीर आरोप तथाकथित ‘पासर सिस्टम’ को लेकर है। आरोप है कि कुछ ट्रांसपोर्टरों से मासिक आधार पर रकम लेकर उनकी गाड़ियों को बिना रोक-टोक गुजरने दिया जाता है।

👨शिकायत के मुताबिक, जिन वाहनों को सुरक्षित मार्ग देना होता है, उनके नंबर पहले से एक व्हाट्सएप ग्रुप में साझा किए जाते हैं। कथित तौर पर ऐसे वाहनों की सूची संबंधित लोगों की डायरी में भी दर्ज रहती है। इसके विपरीत, वैध दस्तावेज रखने वाले कई वाहन संचालकों को रोककर घंटों परेशान किया जाता है और कभी-कभी वाहनों को कार्यालय परिसर तक खड़ा करवा लिया जाता है।

🔴एक साल बाद भी कार्रवाई नहीं!

👨‍💼शिकायतकर्ता का कहना है कि उन्होंने यह पूरा मामला लगभग एक वर्ष पूर्व मुख्यमंत्री कार्यालय, विभागीय सचिव और राज्य कर विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष उठाया था। शिकायतों पर विभिन्न स्तरों से जांच के निर्देश और मार्किंग भी हुई, लेकिन अब तक किसी ठोस कार्रवाई की जानकारी सामने नहीं आई है।यदि शिकायत में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह मामला केवल विभागीय अनियमितता का नहीं, बल्कि सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग, भ्रष्टाचार और राजस्व हितों को नुकसान पहुंचाने का गंभीर प्रकरण साबित हो सकता है।

🔴क्या कहते हैं नियम?

📍सरकारी विभागों के वाहनों का संचालन सामान्यतः अधिकृत और विधिवत नियुक्त चालकों द्वारा किया जाना चाहिए। यदि किसी विभाग में निजी चालकों की सेवाएं ली जाती हैं तो उसके लिए निर्धारित प्रक्रिया, अनुबंध और प्रशासनिक स्वीकृति आवश्यक होती है। ऐसे में शिकायत में लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच कई सवालों के जवाब सामने ला सकती है।

📌“यदि शिकायतकर्ता द्वारा उपलब्ध कराए गए दस्तावेज और विवरण सही हैं तो यह मामला केवल भ्रष्टाचार का नहीं, बल्कि सरकारी तंत्र के समानांतर एक अनधिकृत व्यवस्था चलाए जाने का संकेत देता है। इसकी उच्चस्तरीय जांच आवश्यक है।”

📌“सरकारी सचल दलों का उद्देश्य कर चोरी रोकना है, लेकिन यदि उन्हीं पर संरक्षण और वसूली के आरोप लग रहे हैं तो इससे विभाग की साख और राजस्व व्यवस्था दोनों प्रभावित होती हैं।”

📍“व्हाट्सएप ग्रुप से तय होता था कौन रुकेगा और कौन निकलेगा?”

📍“सरकारी गाड़ियों पर निजी राज, शिकायत के बावजूद कार्रवाई का इंतजार”

📍“टैक्स चोरी रोकने वाले ही बने ‘पासर’! व्यापारी के आरोपों से मचा हड़कंप”,

👉(समाचार में वर्णित आरोप शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए हैं। संबंधित विभाग या अधिकारियों का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।)

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