71 करोड़ रुपये मूल्य की अचल संपत्ति अस्थायी रूप से कुर्क,प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की धनशोधन निवारण (पीएमएलए) अधिनियम 2002 के तहत कार्रवाई।
मुंबई,ईडी ने मीरा भयंदर पुलिस कमिश्नरेट द्वारा बिल्डरों, स्थानीय गुंडों और अन्य के खिलाफ दर्ज कई एफआईआर के आधार पर जांच शुरू की। यह मामला 2009 से “वसई विरार सिटी म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन (वीवीसीएमसी)” के अधिकार क्षेत्र में “सरकारी और निजी भूमि पर आवासीय सह वाणिज्यिक भवनों के अवैध निर्माण” से संबंधित है। वसई विरार शहर की स्वीकृत विकास योजना के अनुसार, “सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट” और “डंपिंग ग्राउंड” के लिए आरक्षित भूमि पर समय के साथ 41 अवैध इमारतॊ का निर्माण किया गया। माननीय बॉम्बे हाईकोर्ट ने अपने आदेश दिनांक 08.07.2024 के तहत सभी 41 इमारतों को गिराने का आदेश दिया। 41 अवैध इमारतों में रहने वाले परिवारों द्वारा माननीय सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष एक विशेष अनुमति याचिका दायर की गई, जिसे खारिज कर दिया गया। सभी 41 इमारतों को गिराने का काम वीवीसीएमसी द्वारा 20.02.2025 को पूरा किया गया।ईडी की जांच से पता चला कि वीवीसीएमसी के अधिकारियों का एक संगठित गिरोह, जैसे कमिश्नर, उप निदेशक, टाउन प्लानर, जूनियर इंजीनियर, आर्किटेक्ट, सीए और लाइजनर, वीवीसीएमसी के कई विभागों में एक-दूसरे के साथ मिलीभगत से काम कर रहे हैं।अवैध निर्माण के विरुद्ध कार्रवाई करने वाले विभाग में, अनिल पवार ने पहले से निर्मित अवैध इमारतों को संरक्षण देने और चल रहे अनधिकृत निर्माणों पर आँखें मूंद लेने के लिए रिश्वत लेने हेतु एक गिरोह बनाया। यह गिरोह वीवीसीएमसी के अधिकार क्षेत्र में बड़े पैमाने पर अवैध निर्माण के लिए ज़िम्मेदार है। पीएमएलए जाँच से पता चला है कि अवैध निर्माण परियोजनाओं पर 150 रुपये प्रति वर्ग फुट की दर से कमीशन लगाया गया था, जिसमें से पवार को निर्मित क्षेत्र के प्रति वर्ग फुट 50 रुपये सीधे तौर पर अपने हिस्से के रूप में प्राप्त हुए। पवार ने इन 41 अवैध अनधिकृत इमारतों को संरक्षण देने के लिए भी उसी दर पर रिश्वत ली।ईडी की जाँच से पता चला है कि इन तरीकों से अनिल पवार ने 169 करोड़ रुपये की आपराधिक आय (पीओसी) अर्जित की। परिणामस्वरूप अनिल पवार, आईएएस, पूर्व आयुक्त को 13.07.2025 को तीन अन्य लोगों के साथ गिरफ्तार किया गया। सभी वर्तमान में न्यायिक हिरासत में हैं। इस मामले में अभियोजन पक्ष की शिकायत 10.10.2025 को दर्ज की गई है। माननीय विशेष पीएमएलए न्यायालय द्वारा अभी तक इस पर संज्ञान नहीं लिया गया है।ईडी की जाँच से पता चला है कि अनिल पवार, आईएएस ने रिश्वत की रकम को सफेद करने के लिए अपने परिवार के सदस्यों/रिश्तेदारों/बेनामीदारों के नाम पर कई संस्थाएँ बनाई। इस प्रकार अर्जित पीओसी का उपयोग पवार ने सोना, हीरे और मोती के आभूषण और महंगी साड़ियाँ खरीदने, गोदामों में निवेश करने, फार्महाउस खरीदने, पत्नी के नाम पर आवासीय परियोजनाओं में निवेश करने आदि में किया है। पवार ने अधिकांश पीओसी का उपयोग अपनी पत्नी, बेटियों और अन्य रिश्तेदारों के नाम पर अचल संपत्तियों में किया है ताकि उन्हें बेदाग संपत्ति के रूप में प्रदर्शित किया जा सके। पीएओ जारी करके कुल 44 करोड़ रुपये की ऐसी संपत्तियाँ कुर्क की गई हैं।इससे पहले मामले में कई तलाशी अभियान चलाए गए थे, जिसके परिणामस्वरूप लगभग 8.94 करोड़ रुपये की नकदी, 23.25 करोड़ रुपये मूल्य के हीरे जड़ित आभूषण और सोना-चांदी जब्त की गई थी और 13.86 करोड़ रुपये मूल्य के बैंक बैलेंस/शेयर/म्यूचुअल फंड/एफडी फ्रीज़ किए गए थे।आगे की जांच प्रक्रियाधीन है।
सतीशकुमार मंडोरा बिंदास बोल संवाददाता मुंबई।

