मुहर्रम के जुलूस में शामिल हुए भाजपा नेता डॉ. रोहित सक्सेना, दिया सामाजिक सौहार्द और एकता का संदेश
रायनी समाज के छठी शरीफ जुलूस में हुई सहभागिता, भाईचारे और गंगा-जमुनी तहजीब को बताया कानपुर की पहचान
कानपुर। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं समाजसेवी डॉ. रोहित सक्सेना ने मुहर्रम की छठी शरीफ के अवसर पर रायनी समाज द्वारा आयोजित पारंपरिक जुलूस में शामिल होकर सामाजिक समरसता, भाईचारे और राष्ट्रीय एकता का संदेश दिया। उनकी उपस्थिति ने आयोजन को विशेष गरिमा प्रदान की और समाज के विभिन्न वर्गों के बीच आपसी सौहार्द को मजबूत करने का कार्य किया।
जुलूस में पहुंचने पर रायनी समाज के पदाधिकारियों, बुजुर्गों, युवाओं एवं गणमान्य नागरिकों ने डॉ. सक्सेना का गर्मजोशी से स्वागत किया। इस दौरान उन्होंने समाज के लोगों से संवाद स्थापित करते हुए कहा कि कानपुर सदियों से गंगा-जमुनी तहजीब, आपसी सम्मान और सामाजिक समरसता का प्रतीक रहा है।
“समाज को जोड़ने वाले पर्व हमारी सबसे बड़ी ताकत हैं” — डॉ. रोहित सक्सेना
डॉ. रोहित सक्सेना ने कहा कि धार्मिक एवं सामाजिक आयोजन केवल परंपराओं के निर्वहन तक सीमित नहीं होते, बल्कि वे समाज को एक सूत्र में बांधने और आपसी विश्वास को मजबूत करने का महत्वपूर्ण माध्यम भी बनते हैं।
“कानपुर की मिट्टी में भाईचारे, सम्मान और एकता की खुशबू रची-बसी है। सभी समाजों के पर्व और आयोजन हमें एक-दूसरे के और करीब लाने का कार्य करते हैं।”
उन्होंने कहा कि जनसेवा किसी जाति, धर्म या वर्ग की सीमाओं में नहीं बंधी होती, बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचकर उसकी समस्याओं के समाधान का प्रयास करना ही सच्ची सेवा का परिचायक है।
“जब हम एक-दूसरे के सुख-दुख में सहभागी बनते हैं, तभी एक मजबूत, समरस और विकसित समाज का निर्माण संभव होता है।”
युवाओं को दिया सामाजिक सौहार्द का संदेश
जुलूस के दौरान डॉ. सक्सेना ने व्यवस्थाओं का जायजा लिया और आयोजकों के साथ मिलकर कार्यक्रम के सफल एवं शांतिपूर्ण संचालन में सहयोग किया। उन्होंने युवाओं से समाज में प्रेम, सद्भाव और आपसी सम्मान बनाए रखने तथा जनहित के कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
रायनी समाज के पदाधिकारियों एवं गणमान्य नागरिकों ने उनके प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि डॉ. रोहित सक्सेना सदैव समाज के बीच उपस्थित रहते हैं और बिना किसी भेदभाव के सभी वर्गों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाते हैं।
समाज के लोगों ने बताया कि शिक्षा, स्वास्थ्य, युवा मार्गदर्शन, सामाजिक जागरूकता और जनहित से जुड़े मुद्दों पर उनकी सक्रियता ने उन्हें विभिन्न समुदायों के बीच एक विश्वसनीय और लोकप्रिय जनसेवक के रूप में स्थापित किया है।
कार्यक्रम में रायनी समाज के पदाधिकारी, क्षेत्रीय गणमान्य नागरिक, युवा एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। पूरा आयोजन शांतिपूर्ण, अनुशासित और सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ, जिसने कानपुर की सामाजिक एकता और भाईचारे की गौरवशाली परंपरा को और अधिक मजबूत करने का कार्य किया।
“सामाजिक समरसता और आपसी सम्मान ही किसी भी शहर और समाज की सबसे बड़ी पूंजी होती है।”
“धर्म अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन मानवता, सेवा और राष्ट्रहित का उद्देश्य सभी का एक ही होता है।”
“समाज को बांटने वाली नहीं, बल्कि जोड़ने वाली सोच ही राष्ट्र को सशक्त और समृद्ध बनाती है।”

