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खेल चंदे का,मुतवल्ली परेशान,नयी कमेटी की मांग

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कानपुर। शुजातगंज थाना रेल बाज़ार स्थित नई मस्जिद परिसर पर क़ाज़ी-ए-शहर कानपुर, मुफ़्ती साकिब अदीब मिस्बाही की शह पर, भंग कमेटी के पूर्व सचिव जियाउल हशमत उर्फ़ अल्लन द्वारा वित्तीय अनियमित्ता, मस्जिद पर अवैध क़ब्ज़ा करने प्राने ऐतिहासिक निर्माण को बिना वक्फ़ बोर्ड की लिखित सहमति/अनुमति के ढहाने और मुतावल्ली व अवाम को हराने धमकाने के संबन्ध में प्रेस कांफ्रेंस ।मुख्य विवरणआज की यह प्रेस कांफ्रेंस मुतवल्ली नई मस्जिद शुजात गंज कानपुर नगर एवं स्थानीय गणमान्य नागरिकों द्वारा एक अत्यन्त गंभीर और संवेदनशील मुद्दे पर शासन प्रशासन, अवाम और मीडिया का ध्यान आकर्षित करने के लिए किया गया है।कमेटी भंग होने के बाद भी जबरन कब्ज़ा : मुतवल्ली द्वारा पुरानी कमेटी को वित्तीय अनियमित्ताओं, ग़लत एवंमनमाने फ़ैसलों की शिकायतों के आधार पर पूरी तरह भंग करने के बावजूद पूर्व सचिव ज़ियाउल हशमत उर्फ़ अल्लन क़ाज़ी-ए-शहर साकिब अदीब की शह पर पद छोड़ने को तैयार नहीं हैं और बाहुबल के दम पर मस्जिद प्रबंधन पर जबरन क़ब्ज़ा जमाए हुए हैं। (सचिव के द्वारा धोखे से मुतवल्ली के वक्फ़ मस्जिद एवं मकानों से सम्बंधित कागज़ात भी ले लिए गए हैं)स्थानीय भावनाएं आहत जियाउल हशमत उर्फ़ अल्लन के इस कृत्य के कारण स्थानीय अवाम और नमाज़ियों में भारी गुस्सा और नाराज़गी है इससे क्षेत्र का सम्प्रदायिक सौहार्द और शान्ति व्यवस्था भी खतरे में पड़ सकती है।आठ सालों के हिसाब में हेरफेर: उक्त पूर्व सचिव द्वारा पिछले 8 वर्षों की आमदनी एवं ख़र्च का कोई हिसाब किताब नहीं दिया गया है। बार-बार माँगने पर भी वे हिसाब किताब देने से कतरा रहे हैं, जो एक बड़े घोटाले की ओर इशारा करता है।वक्फ़ बोर्ड के नियमों का उल्लंघन: बिना उत्तर प्रदेश सुन्नी सेन्ट्रल वक्फ़ बोर्ड की लिखित अनुमति/सहमति के उन्होंने मस्जिद के पुराने ऐतिहासिक निर्माण को अवैध रूप से तोड़ दिया है, जो वक्फ़ अधिनियम का सीधा उल्लंघन है।पुलिस प्रशासन का दुरूपयोग: जब भी मुतवल्ली, अवाम या नमाज़ी उनसे हिसाब मांगते हैं तो उनके द्वारा पुलिस में झूठी और मनगढंत शिकायतें दर्ज कराकर मुतवल्ली, अवाम और नमाज़ियों को डराने धमकाने और प्रताड़ित करने का काम कर रहे हैं।मुख्य वक्तव्यमस्जिद अल्लाह का घर है और वक्फ़ की मिल्कियत, अवाम की अमानत है। जियाउल हशमत उर्फ़ अल्लन इसे अपनी निजी जागीर समझ के ग़लत इस्तेमाल कर रहे हैं। हम इस तानाशाही और वित्तीय भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ कड़ा रुख अपना रहे हैं।1) पिछले आठ सालों का ऑडिट: प्रशासन और वक्फ़ बोर्ड की निगरानी में पिछले आठ (8) सालों के आय-व्यय की निष्पक्ष जाँच (ऑडिट) कराई जाए।2) क़ाज़ी-ए-शहर की संलिप्ता एवं भूमिका की जाँच: क़ाज़ी-ए-शहर कानपुर मुफ़्ती साकिब अदीब मिस्बाही साहब किस कारणवश ज़ियाउल हशमत उर्फ़ अल्लन के साथ नई मस्जिद शुजात गंज के संरक्षक बनने के लिए वक्फ़ बोर्ड में हलफ़नामा पेश कर रहे हैं जबकि मुतवल्ली मोईनुद्दीन के द्वारा कई बार उनसे इस मामले में क़ाज़ी होने की हैसियत से हक़ फ़ैसला कराने की लिखित और मौखिक गुज़ारिश की गयी लेकिन वो मामले को लगातार टालते रहे और कुछ समय बाद जब मुतवल्ली के संज्ञान में उनके द्वारा वक्फ़ बोर्ड में संरक्षक बनने का हलफनामा दिये जाने की बात सामने आई तब इस बात की आवश्यकता महसूस हुई कि वित्तीय घोटाले में उनकी हिस्सेदारी या संलिप्ता की भी जाँच प्रशासन एवं वक्फ बोर्ड के द्वारा करायी जाये ।3) अवैध क़ब्ज़े से मुक्ति: ज़ियाउल हशमत उर्फ़ अल्लन को मस्जिद के प्रबन्धन और परिसर से तुरन्त बेदखल कर चाभियाँ मुतवल्ली को सौंपी जाएँ, और अल्लन द्वारा अर्जित संपत्ति की जांच कराई जाए।4) अवैध क़ब्ज़े से मुक्ति: बिना वक्फ़ की लिखित अनुमति/सहमती के पुराना ऐतिहासिक निर्माण तोड़ने और वक्फ़ सम्पत्ति को नुकसान पहुँचाने के लिए सुसंगत धाराओं में मुक़दमा दर्ज किया जाए।5) झूठे मुक़दमों पर रोक: पुलिस प्रशासन ज़ियाउल हशमत उर्फ़ अल्लन के द्वारा की जा रही झूठी शिकायतों की निष्पक्ष जाँच करे ताकि निर्दोष अवाम और मुतवल्ली का उत्पीड़न बंद हो और दर्ज किये गए झूठे मुक़दमे वापस हों ।

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