एक साल में भी पूरी नहीं हो सकी हलीम पीजी के करोड़ों के फीस घोटाले की जांच

एक साल में भी पूरी नहीं हो सकी हलीम पीजी के करोड़ों के फीस घोटाले की जांच!
– पहले ऑडिटर जनरल ऑफिस तो अब संयुक्त शिक्षा निदेशक ने प्रबंधन को लिखा कड़ा पत्र
हलीम मुस्लिम परास्नातक कालेज प्रबंधन पर घोटालों के आरोपों की लंबी फेहरिस्त लगातार सामने आती रही है। इन्हीं आरोपों में सबसे गंभीर मामला गरीब अल्पसंख्यक विद्यार्थियों से वसूली गई फीस में कथित तौर पर 1.87 करोड़ रुपये के गबन का है। यह मामला पिछले वर्ष 2025 के पूर्वार्ध में तब सुर्खियों में आया, जब शिकायत के बाद उत्तर प्रदेश सरकार के प्रधान लेखाकार कार्यालय ने पूरे प्रकरण की जांच बैठा दी।
सूत्रों के मुताबिक, प्रधान लेखाकार कार्यालय प्रयागराज ने क्षेत्रीय उच्च शिक्षाधिकारी, कानपुर क्षेत्र को 26 जून और फिर 1 जुलाई 2025 को पत्र भेजकर निर्देश दिया था कि हलीम पीजी कालेज प्रबंधन को ऑडिट टीम के समक्ष सभी जरूरी अभिलेख और खाते प्रस्तुत करने के आदेश दिए जाएं। पत्र में स्पष्ट किया गया था कि लखा परीक्षा दल संख्या-5 कॉलेज के खातों और दस्तावेजों की विस्तृत ऑडिट जांच करेगा।
हैरानी की बात यह है कि 11 महीनों से अधिक समय बीत जाने के बावजूद जांच आज तक पूरी नहीं हो सकी। आरोप है कि कॉलेज प्रबंधन की कथित मनमानी और असहयोग के चलते ऑडिट प्रक्रिया लगातार प्रभावित होती रही। नतीजतन, हजारों गरीब अल्पसंख्यक छात्रों की फीस के करोड़ों रुपये के कथित घोटाले की जांच अधर में लटक गई।
मामले की गंभीरता को देखते हुए अब प्रधान लेखाकार कार्यालय के निर्देश पर संयुक्त शिक्षा निदेशक, उच्च शिक्षा उत्तर प्रदेश ने सीधे कॉलेज प्रबंधन को कड़ा पत्र जारी किया है। पत्र में स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि यदि ऑडिट टीम को तत्काल प्रपत्र और रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराए गए, तो इसके परिणामों के लिए प्रबंधन स्वयं जिम्मेदार होगा।
पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि शिकायतकर्ता ने मुस्लिम एसोसिएशन के सचिव मोहम्मद जावेद पर गरीब अल्पसंख्यक विद्यार्थियों की फीस की रकम में गबन का आरोप लगाया है। गौरतलब है कि मोहम्मद जावेद, हलीम पीजी कॉलेज संचालित करने वाली संस्था मुस्लिम एसोसिएशन के सचिव हैं, जबकि संस्था के सदर अब्दुल हसीब उनके सगे बड़े भाई बताए जाते हैं। सरकारी अनुदान प्राप्त शिक्षण संस्थान की समिति में नजदीकी रिश्तेदारों के प्रमुख पदों पर काबिज होने को लेकर भी कई आपत्तियां पहले से उठती रही हैं।
कालेज में सेफ तोड़कर निकाले गए प्रपत्र?
सूत्रों के अनुसार, लगातार तीन सरकारी रिमाइंडर और फटकार के बाद कॉलेज प्रबंधन में हड़कंप मचा हुआ है। चर्चा है कि 1.87 करोड़ रुपये के कथित फीस घोटाले से जुड़े अहम दस्तावेज कॉलेज अकाउंटेंट की सेफ में रखे गए थे।
बताया जा रहा है कि जब प्रबंधन की ओर से दस्तावेज मांगे गए तो अकाउंटेंट ने लिखित आदेश की मांग की। कथित तौर पर लिखित निर्देश न मिलने पर उसने सेफ खोलने से इनकार कर दिया। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन कॉलेज परिसर में यह चर्चा तेज है कि बाद में सेफ को तोड़कर दस्तावेज किसी ने निकाल लिए।
यदि यह चर्चा सही साबित होती है, तो मामला केवल वित्तीय अनियमितता तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सरकारी जांच में बाधा पहुंचाने और सबूतों से छेड़छाड़ जैसे गंभीर आरोप भी जुड़ सकते हैं।


