गरीबों के सहारे की आड़ में खेल?आश्रम पर अंग तस्करी और हत्या के आरोप

🔪अपना घर आश्रम पर मानव अंग तस्करी के गंभीर आरोप, दलित महिला ने पति की हत्या व शव गायब करने का लगाया आरोप
👉राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने लिया संज्ञान, डीएम और पुलिस कमिश्नर से मांगी रिपोर्ट
👉 पीड़िता ने स्थानीय पुलिस पर मिलीभगत और लीपापोती का लगाया आरोप
👉आश्रम प्रबंधन ने आरोपों को बताया मनगढ़ंत, लगाया वसूली का आरोप
कानपुर। महानगर के सेन पश्चिम पारा स्थित तौधकपुर में संचालित अपना घर आश्रम एक बार फिर गंभीर आरोपों के घेरे में है। जाजमऊ क्षेत्र निवासी दलित महिला विमला पासवान ने आश्रम संचालकों पर मानव तस्करी, अंग तस्करी और पति की संदिग्ध मौत के बाद शव गायब करने जैसे सनसनीखेज आरोप लगाए हैं।पीड़िता के अनुसार, उनके पति ओमप्रकाश पासवान को कथित तौर पर सड़क से उठाकर जबरन आश्रम में रखा गया, जहां उनकी संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। आरोप है कि मौत के बाद बिना परिजनों को सूचना दिए शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया।मामले की शिकायत पर राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने संज्ञान लेते हुए जिलाधिकारी और पुलिस कमिश्नर को नोटिस जारी कर 15 दिनों के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट मांगी है।
📍“पति को देखने तक नहीं दिया, चुपचाप कर दिया अंतिम संस्कार”

👉पीड़िता विमला पासवान का कहना है:>
📌“मेरे पति जिंदा थे, मैं उन्हें लेने जाने वाली थी। लेकिन अचानक कहा गया कि उनकी मौत हो गई और बिना हमें बताए उनका दाह संस्कार कर दिया गया। हमें अपने ही पति का चेहरा तक देखने नहीं दिया गया।
👉”उन्होंने आरोप लगाया कि आश्रम संचालक गरीब और बेसहारा लोगों को सहारे के नाम पर लाते हैं और फिर उनका कोई पता नहीं चलता।
📍स्थानीय पुलिस पर भी सवाल, जांच पर उठी उंगली, पीड़िता ने थाना स्तर की जांच पर गंभीर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि:>
📌“पुलिस ने निष्पक्ष जांच नहीं की, बल्कि आश्रम संचालकों का पक्ष लेते हुए गलत रिपोर्ट लगा दी। मुझे लगातार दबाव और धमकियां भी दी गईं। ”उन्होंने कहा कि न्याय के लिए उन्हें आयोग तक जाना पड़ा।
🛑क्या यह आपराधिक लापरवाही नहीं?
👉मामले में आश्रम प्रबंधन का कहना है कि ओमप्रकाश पासवान की मौत एक्यूट डायरिया के कारण हुई। लेकिन बड़ा सवाल यह उठता है कि:गंभीर हालत के बावजूद अस्पताल में भर्ती क्यों नहीं कराया गया?
👉मेडिकल सुविधा के बिना गंभीर मरीजों को आश्रम में क्यों रखा गया?
📌इस पर विशेषज्ञों का मानना है कि >
📍“यदि किसी बीमार व्यक्ति को समय पर अस्पताल न ले जाकर उसकी हालत बिगड़ने दी जाती है, तो यह आपराधिक लापरवाही (Criminal Negligence) के दायरे में आ सकता है।
📍आश्रम प्रबंधन का पलटवार:
📍“वसूली के लिए लगाए जा रहे आरोप”आश्रम के सचिव जेपी सिंह और संचालक उमा शुक्ला ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका कहना है:>
👉“ये आरोप पूरी तरह बेबुनियाद हैं। महिला हम पर दबाव बनाकर पैसे मांग रही थी। शिकायत वापस लेने के लिए लाखों रुपये की मांग की गई।”
🛑जांच जारी, प्रशासन की नजर मामले की जांच कर रहे एडीसीपी साउथ ने बताया कि >
📌 “आश्रम पर लगे आरोपों की जांच की जा रही है। सभी बिंदुओं पर तथ्यों के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।”
📍बड़ा सवाल यह मामला कई गंभीर सवाल खड़े करता है:क्या आश्रमों की आड़ में अवैध गतिविधियां चल रही हैं? 📍क्या गरीब और बेसहारा लोग सबसे आसान निशाना बन रहे हैं?📍क्या स्थानीय स्तर पर जांच में पारदर्शिता की कमी है?
🛑“अगर आरोपों में सच्चाई है,तो यह केवल एक हत्या का मामला नहीं, बल्कि सिस्टम की संवेदनहीनता और गरीबों के शोषण का भयावह चेहरा है”


